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ITI GK in Hindi : आईटीआई ट्रेड ज्ञान

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# ए.सी./डी.सी. वोल्टता, डी.सी. एम्पियर तथा प्रतिरोध मापने वाला उपकरण मल्टीमीटर कहलाता है।

# सामान्य प्रकार का वोल्टमापी ए.सी. का R.M.S. मान मापता है (शिखर मान नहीं)।

# धारामापी को श्रेणी क्रम में जोड़ा जाता है।

# विद्युत तापक के तार सामान्य रूप से नाइक्रोम के बने होते हैं।

# चुम्बकीय गुंजन (हमिंग) चुम्बकीय बलों के कारण उत्पन्न होती है।

# विद्युत रंजन प्रक्रिया में धनोद से नोबल धातु प्लेट जुड़ा होता है।

# विद्युत रंजन प्रक्रिया में डी.सी. विद्युत सप्लाई होती है।

# बड़े जनित्र में प्रयोग किये जाने वाले ब्रश तांबे के होते हैं।

# बैट्री आवेषण (चार्जिंग) कार्य के लिए शंट जनित्र उपयुक्त होता है।

# ओवर लोड क्वायल का कार्य ओवर लोड की स्थिति में मोटर को आफ (बन्द) करना होता है।

# अल्टरनेटर द्वारा उत्पन्न वि.वा.ब. की आवृत्ति पोल्स की संख्या तथा घूर्णन गति पर निर्भर करती है।

# विद्युत आर्क भट्टी का तापमान मापने के लिए पायरोमीटर का प्रयोग किया जाता है।

# यदि सप्लाई के कोई दो फेज आपस में बदल दिए जाएं तो प्रेरण मोटर उल्टी दिशा मे चलेगी।

# ताप वृद्धि से संधारित्र की धारिता बढ़ती है।

# किसी चालक/प्रतिरोधक का प्रतिरोध मापने वाले यंत्र को ओममापी (ओममीटर) कहते हैं।

# बल्ब का प्रकाशित होना, विद्युत-धारा के उष्मीय प्रभाव का उदाहरण है।

# मरकरी वाष्प लैम्प की औसत आयु 3000 घण्टे होती है।

# n-प्रकार का अर्द्धचालक ‘मुक्त इलैक्ट्रान्स’ की बहुलता वाला होता है।

# पूरक सममिति प्रवर्द्धक (Complementry sysmmetry amplifire) परिपथ में दो ट्रांजिस्टर PNP एवं NPN प्रयोग किये जाते हैं।

# दिक्परिवर्तक ब्रशों के लिए सामान्यतः कार्बन का प्रयोग किया जाता है।

# बंद डी.सी.परिपथ में किसी संगम पर धाराओं का बीजगणितीय योग शून्य होता है।

# विद्युत उत्पादन केन्द्र से विद्युत शक्ति का प्रेषण अत्यधिक उच्च ए.सी. वोल्टता पर किया जाता है, क्योंकि उच्च वोल्टता पर धारा का मान कम होने के कारण शक्ति ह्रास कम होता है।

# विद्युत उत्सर्जन बत्तियों में प्रकाश कैथोड किरण उत्सर्जन द्वारा होता है।

# प्रकाश का रंग, तरंगदैर्ध्य पर निर्भर करता है।

# विद्युत वितरण प्रणाली में स्टार संयोजन (स्टार कनेक्शन) का प्रयोग किया जाता है।

# विद्युत स्टोव का उष्मक तन्तु चीनी मिट्टी की चकती में स्थापित किया जाता है।

# ए.सी. को डी.सी.मे परिवर्तित करने के लिए कम से कम एक डायोड चाहिए।

# ‘होल्स’ की बहुलता वाला अर्द्धचालक पदार्थ p–पदार्थ कहलाता है।

# ’वोल्टता रैगुलेटर’ परिपथ में प्रयोग किया जाने वाला डायोड जेनर डायोड है

# किसी ट्रांसफार्मर की लपेटें प्रेरणिक विधि से सम्बंधित (कपल्ड) रहती हैं।

# प्रतिरोध का मात्रक ओम होता है।

Science GK In Hindi : सामान्य विज्ञान के महत्वपूर्ण प्रश्न

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