फिर झेलना होगा सबसे बड़ा संकट

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दुनिया एक बार फिर मंदी की ओर बढ़ रही है और इसकी सबसे बड़ी वजह है कर्ज | दुनियाभर में सार्वजनिक और निजी कर्ज जिस तरह बढ़ते हुए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच चुका है, उससे वैश्विक मंदी का खतरा मंडराने लगा है| अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के मुताबिक, वैश्विक कर्ज बढ़कर 164 ट्रिलियन डॉलर यानी 164 लाख करोड़ डॉलर की रिकॉर्ड ऊंचाई पर है| यदि इस कर्ज को भारतीय मुद्रा में बदलें तो यह करीब 10,66,000000 करोड़ रुपए (करीब 10,660 लाख करोड़ रुपए) है|

आईएमएफ ने बढ़ते वैश्विक कर्ज के इस ट्रेंड को खतरनाक बताया है| आईएमएफ ने कहा है कि वित्तीय स्थिति बिगड़ने पर तमाम देशों के लिए अपने कर्ज को चुकाना मुश्किल हो जाएगा और दुनिया भीषण वैश्विक मंदी की चपेट में आ सकती है| ब्लूमबर्ग में छपी रिपोर्ट के मुताबिक, बढ़ता कर्ज वैश्विक मंदी का सबसे बड़ा कारण बन सकता है|

कुल कर्ज दुनिया की 225 प्रश जीडीपी के बराबर

आईएमएफ की फिस्कल मॉनिटर रिपोर्ट की माने तो वर्ष 2016 में ग्लोबल पब्लिक और प्राइवेट कर्ज बढ़ते हुए अपने रिकॉर्ड उच्च स्तर पर पहुंच चुका है और यह दुनिया की जीडीपी का 225 प्रतिशत हो चुका है| इससे पहले वैश्विक कर्ज 2009 में अपने उच्च स्तर पर था|

चीन पर सबसे ज्यादा क़र्ज़

इकोनॉमिक टाइम्स की माने तो दुनिया में निजी कर्ज बहुत ही तेजी से बढ़ रहा है खासकर चीन में| दुनियाभर के कुल निजी खर्च का करीब 3 चौथाई हिस्सा तो सिर्फ चीन का है| आईएमएफ की रिपोर्ट में कहा गया है कि बहुत ज्यादा कर्ज से देशों के खर्च बढ़ाने की क्षमता पर भी बुरा असर पड़ेगा| इससे उनकी विकास दर प्रभावित होगी और वे मंदी के चपेट में भी आ सकते हैं|

अमरीका पर संकट के बादल

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने देशों से अपने फिस्कल डेफिसिट को लेकर निर्णायक कदम उठाने का सुझाव दिया है| कोष ने अमरीका से कहा है कि वह अपनी फिस्कल पॉलिसी को फिर से तय करे| अमरीका का फिस्कल डेफिसिट जिस गति से बढ़ रहा है, उस हिसाब से वह 2020 में 1 ट्रिलियन डॉलर यानी 1 लाख करोड़ डॉलर तक पहुंच जाएगा|

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