ऐसे मिल सकती है आमजन को राहत

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विगत कुछ दिनों से देश में पेट्रोल के दाम आसमान पर हैं| देश के अधिकांश हिस्सों में पेट्रोल के दाम 80 रूपए प्रति लीटर तक पहुंच गए हैं, लेकिन बावजूद इसके पेट्रोल के बढ़ते दामों को लेकर सरकार ने कोई सकारात्मक कदम नहीं उठाया है| बढ़ती महंगाई के बीच पेट्रोल के दामों में आया उछाल लोगों की परेशानी बढ़ाने का काम कर रहा है, लेकिन बावजूद इसके आम आदमी को सरकार की नीतियों के चलते यह फैसला स्वीकार करना ही पड़ेगा|

क्या कोई रास्ता है, जिससे पेट्रोल के अनियंत्रित रूप से बढ़ते दामों पर लगाम लगाई जा सके, जिससे दूसरे देशों की तरह हमारे यहां भी कम से कम टैक्स के साथ पेट्रोल मिले| पेट्रोल के बढ़ते दामों को लेकर अब आम आदमी के जेहन में बस एक ही सवाल है कि आखिर वह कौन सा रास्ता है, जिससे आम आदमी को पेट्रोल पर राहत मिल सके क्योंकि पेट्रोल का पूरा अर्थशास्त्र कच्चे तेल की कीमतों पर निर्भर है और कच्चे तेल के दाम 2012 से लेकर अब तक 109 रुपए प्रति बैरल से कम होकर 52 रुपए प्रति बैरल तक आ गए हैं, लेकिन राज्यों के वैट और केंद्र की एक्साइज ड्यूटी के चलते पेट्रोल के दाम अभी भी वहीं के वहीं है|

पेट्रोल महंगा करना इसलिए भी सरकार के लिए जरूरी है क्योंकि इससे सरकार बड़ी आमदनी अपने राजस्व कोष में हासिल करती है| इस लिस्ट के माध्यम से आप समझ सकते हैं कि 2013 से 2017 तक सरकार को पेट्रोल से कुल कितनी आमदनी हुई|

पेट्रोल डीजल के दामों पर देश में सभी राज्यों में सरकार अलग-अलग टैक्स लेती है| ऐसे में हर राज्य का पेट्रोल पर टैक्स का गणित अलग-अलग होता है| केंद्र के अलावा राज्यों की सरकार भी पेट्रोल-डीजल पर भारी टैक्स लगाकर अपनी कमाई करती है| यदि इन सरकारों का भार जनता पर न हो तो भी पेट्रोल के दाम नीचे आ सकते हैं|

केंद्र सरकार पेट्रोल के दामों को लेकर अंतरराष्ट्रीय बाज़ार का हवाला तो देती है, लेकिन उसके पीछे के असली कारण शायद जनता को बताए ही नहीं जाते हैं| आज देश के सभी बड़े राज्यों में जनता को 107 से लगाकर 110 प्रतिशत तक टैक्स देना होता है| ऐसे में पेट्रोल की कीमतों को लेकर आम आदमी की परेशानी सिर्फ जीएसटी के माध्यम से ही दूर हो सकती है| यदि सरकार पेट्रोल पर 28 प्रतिशत तक भी जीएसटी लगाती है, जो केवल लग्जरी वस्तुओं पर है तो भी इसकी कीमत 52 रुपए प्रति लीटर तक ही होगी वहीं  18 प्रतिशत जीएसटी लगाने पर कीमतें 40 रुपए के लगभग जाएंगी| ऐसे में सरकार की जीएसटी परिषद् को भी पेट्रोल और डीजल को जीएसटी के दायरे में लाने के लिए पहल करने की जरूरत है| यदि यह महत्वपूर्ण उत्पाद जीएसटी के दायरे में आता है तो आम लोगों की सबसे बड़ी परेशानी आसानी से दूर हो सकेगी|

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