रिलायंस जिओ ने मिलाया इसरो से हाथ, अब हर जगह चलेगा 4जी

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देश में मोबाइल क्रांति लाने वाले रिलायंस समूह ने ‘रिलायंस जिओ’ बाज़ार में उतरकर बाकी सभी टेलीकम्युनिकेशन कंपनियों को कड़ी टक्कर दी है। अपने सस्ते और किफायती टैरिफ दामों के बलबूते भारतीय बाज़ार में अपने कदम जमा चुका जिओ अब अपनी 4 जी सेवाओं का बड़ा विस्तार करने जा रहा है। इसके लिए रिलायंस समूह ने इसरो यानी भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान केंद्र से हाथ मिलाया है।

रिलायंस जिओ ने भारत के ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों को अपने 4जी एलटीई आधारित वॉइस और डाटा सर्विस से जोड़ने के लिए सेटेलाइट का उपयोग करने की योजना बनाई है। कंपनी इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन (इसरो) और ह्यूग्‍स कम्युनिकेशंस (एचसीआईएल) की टेक्नोलॉजी का उपयोग करते हुए अपनी तरह के पहले सेटेलाइट बैकहॉल बेस्ड नेटवर्क को लागू करने जा रही है।

मौजूदा समय में टेरेस्ट्रियल बैकहॉल सर्विस की पहुंच से बाहर है| जिओ अपनी सर्विस बढ़ाने के लिए 400 से अधिक एलटीई साइट को इस सैटेलाइट बैकहॉल बेस्ड नेटवर्क के जरिये जोड़ने जा रही है। दूरदराज के ऐसे इलाके, जहां अभी 4 जी नेटवर्क नहीं है, जिओ वहां 4 जी नेटवर्क मुहैया करवाने के लिए एक करोड़ डॉलर खर्च कर रही है। ऐसे इलाकों में 4जी नेटवर्क के लिए सैटेलाइट बैकहॉल स्थापित करने के लिए ह्यूग्‍स कम्युनिकेशंस को एक करोड़ डॉलर का ठेका दिया है।

फाइबर लाइन को बिछाना बहुत महंगा होता है, इस कारण देश की सभी टेलीकॉम  कंपनियां मोबाइल से टॉवर को जोड़ने के लिए माइक्रोवेव का इस्तेमाल करती है। इसी कारण ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में ठीक से मोबाइल नेटवर्क न मिलने की समस्या आम हो चुके हैं। जिओ के इस कदम के बाद शायद यह समस्या दूर हो जाए।

जिओ के ग्रुप प्रेसिडेंट ज्यो‍तींद्र ठाकरे ने कहा, “उनकी कंपनी अपने 4जी साइट्स को समर्थन देने के लिए ह्यूग्‍स के जुपिटर सिस्टम का उपयोग कर रही है। उन्होंने कहा कि सैटेलाइट सिस्टम देश के हर हिस्से में सर्वव्यापी और निर्बाध कनेक्टिविटी प्रदान करने के हमारे लक्ष्य को पूरा करने में महत्वपूर्ण है।”

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