आरबीआई के ख़ज़ाने से कम होगी पूंजी

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भारतीय रिज़र्व बैंक  (RBI) ने आर्थिक पूंजी के ढांचे पर बुधवार को पूर्व गवर्नर विमल जालान (Former RBI Governor Bimal Jalan To Head 6 Member Panel) की अगुवाई में एक 6 सदस्यीय विशेषज्ञ  समिति का गठन किया। यह समिति आरबीआई को कितनी पूंजी अपने पास रखनी है, यह सलाह देगी। शेष बची पूंजी सरकार के हवाले कर दी जाएगी। पिछले वित्तीय वर्ष के अंत में आरबीआई के पास 9.6 लाख करोड़ रुपए की पूंजी बताई गई थी।

जालान की अगुवाई में गठित विशेषज्ञ समिति ( Former RBI Governor Bimal Jalan To Head 6 Member Panel ) 90 दिनों के अंदर अपनी रिपोर्ट दाखिल कर देगी। इस अतिरिक्त कोष को लेकर ही मोदी सरकार और आरबीआई के पूर्व गवर्नर उर्जित पटेल के बीच गहरे मतभेद बने थे, जिसके बाद उर्जित पटेल ने अपने गवर्नर के पद से निजी कारणों का हवाला देते हुए इस्तीफ़ा दे दिया था। इस अतिरिक्त राशि के मामले में वित्त मंत्रालय का कहना है कि आरबीआई के पास अपनी कुल संपत्ति के 28 फीसदी के बराबर बफर पूंजी है, जबकि वैश्विक स्तर पर केंद्रीय बैंकों द्वारा रखी जाने वाली रिजर्व पूंजी का नियम 14 फीसदी का ही है। वैश्विक स्तर पर केंद्रीय बैंकों द्वारा आरबीआई में रखी जाने वाली रिज़र्व पूंजी की तुलना में आरबीआई के पास रखी पूंजी कहीं ज्यादा है।

इस मामले में रिजर्व बैंक का कहना है कि “बैंक की केंद्रीय बोर्ड की 19 नवंबर 2018 को हुई बैठक में यह फैसला किया गया कि, आरबीआई ने भारत सरकार के साथ सलाह-मशवरा करने के बाद एक विशेषज्ञ समिति (Former RBI Governor Bimal Jalan To Head 6 Member Panel) का गठन किया है, जो आरबीआई के आर्थिक पूंजी ढांचे की समीक्षा करेगी।”

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