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अब टोल टैक्स होंगे डिजिटल, लंबी कतारों से मिलेगा छुटकारा

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अगर आप ज्यादातर नेशनल हाइवे पर सफर करते हैं तो यह खबर आपके लिए है। दरअसल केंद्र सरकार अब ई-टोल (E-Toll) को लेकर बेहद ज्यादा गंभीर हो गई है। इसे लेकर अब सरकार ने बेहद ही कड़ा रुख अपना लिया है। सरकार ने यह कड़ा रुख ई टोल कलेक्शन स्कीम की असफलता को देखते हुए अपनाया है। अब सरकार आगमी 1 दिसंबर से टोल टेक्स को लेकर नए नियम लागू करने जा रही है। दरअसल डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देने और कैशलेस टोल प्रकिया को लागू करने के लिए सरकार टोल टैक्स के नए नियमों को लागू करने जा रही है।

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गौरतलब है कि 1 दिसंबर से लागू होने वाले नए नियमों के तहत अगर कोई वाहन चालक फास्ट टैग लेन में बिना फास्ट टैग होने पर घुसता है तो उसे दोगुना टैक्स का भुगतान करना होगा। अगर कोई वाहन चालक कैश के माध्यम से टैक्स का भुगतान करना चाहता है तो उसे कैश वाली लेन में ही जाना होगा। इस नियम के लागू किए जाने के बाद हर टोल टैक्स पर कैश भुगतान के लिए केवल एक ही लेन होगी। बाकी सारी लेन फास्ट टैग की होगी। अगर कोई वाहन चालक गलती से भी किसी भी फास्ट टैग की लेन में घुस जाता है तो उसे दोगुना टैक्स चुकाना पड़ेगा। यह आदेश परिवहन मंत्रालय की तरफ से जारी किया गया है। वहीं राष्ट्रीय राजमार्ग पर हर टोल प्लाजा पर सिर्फ़ एक लेन ही कैश भुगतान के लिए रखी जाएगी। बाकी अन्य सारी लेन फास्ट टैग की होंगी।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार अभी तक 25 फ़ीसदी टैक्स का भुगतान फास्ट टैग द्वारा जबकि 75 फीसदी भुगतान कैश के माध्यम से किया जाता है। सरकार बेहद जल्द इस सिस्टम को कैशलेस करना चाहती है और ई-टोल को बढ़ावा देना चाहिए। इसी वजह से सरकार ने नए दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं। हालांकि यह सिस्टम रातों-रात या फिर अचानक ही लागू नहीं किया जा रहा, बल्कि सरकार पिछले लगभग 3-4 सालों से फ़ास्ट टैग को बढ़ावा दे रही है और इसके लिए उचित कदम भी उठा रही है। हालांकि सरकार की तमाम कोशिशों के बाद भी न तो नतीजे बेहतर रूप से सामने आ रहे थे और न ही इस सिस्टम को सफल बनाया जा पा रहा था। बीते वित्त वर्ष पर नज़र डाली जाए तो वित्त वर्ष 2018-19 में लगभग 24000 करोड़ रुपए का टैक्स प्राप्त किया गया था, जिसमें केवल 25% भुगतान ही डिजिटल पैमेंट के माध्यम से किया गया था।

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अब सरकार फ़ास्ट टैग को बढ़ावा दे रही है। फ़ास्ट टैग एक डिवाइस होती है जिसे आप अपनी कार के आगे चिपका सकते हैं। इसके बाद जब आरएफआईडी तकनीक पर आधारित फ़ास्ट टैग से लैस गाड़ी टोल टैक्स की फ़ास्ट टैग लेन से गुजरती है तो रेडियो फ्रीक्वेंसी तकनीक की मदद से फ़ास्ट टैग स्कैन हो जाता है। फ़ास्ट टैग स्कैन होते ही स्वतः डिजिटल पेमेंट से टैक्स का भुगतान हो जाता है और इसके लिए वाहन चालक को टोल पर रुकना नहीं पड़ता। इस वजह से नाके पर वाहनों की कतारें नहीं लगती और लोगों को काफी आसानी रहती है। फ़ास्ट टैग को अपने बैंक से लिंक किया जा सकता है ताकि उसक रिचार्ज खुद अपने आप ही हो जाए।

अब टोल टैक्स होंगे डिजिटल, लंबी कतारों से मिलेगा छुटकारा

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