Flashback 2019 : व्यापार जगत और अर्थव्यवस्था से जुड़ी 10 बड़ी घटनाएं

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साल 2019 का आखिरी माह चल रहा है (Flashback 2019) और कुछ ही दिनों में साल 2019 ख़त्म हो जाएगा और आएगा नया साल जिसका स्वागत सभी करेंगे। लेकिन आपको बता दें कि साल 2019 व्यापार जगत के लिहाज से कुछ ख़ास नहीं रहा। व्यापारी वर्ग इस साल को जितना जल्दी हो सके भुला देना चाहते हैं। इस साल जहां GDP काफी नीचे गिरी वहीं आर्थिक मंदी ने सभी को रुला दिया। हालांकि सरकार ने कॉर्पोरेट टैक्स और कैपिटल गैन टैक्स में छूट देकर उद्योगपतियों को और व्यापारियों को राहत देने का प्रयास किया लेकिन फिर भी इसका ज्यादा असर देखने को नहीं मिला। चलिए डालते हैं एक नज़र व्यापार जगत से जुडी इस साल की 10 बड़ी घटनाओं पर।

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आर्थिक सुस्ती – इस साल (Flashback 2019) कारोबार जगत को आर्थिक मंदी ने बेहद परेशान किया। आर्थिक मंदी सिर्फ देश ही नहीं बल्कि दुनिया भर में फैली हुई है। ऑटोमोबाइल, खनन, रिटेल से लेकर रियल स्टेट सेक्टर भी इससे अछूता नहीं रहा। आर्थिक विशेषज्ञ भी यह समझने में असमर्थ हैं कि यह सुस्ती संरचनात्मक है या चक्रीय। हालांकि सरकार ने इस परेशानी से निपटने के लिए और ग्रोथ को बढ़ाने के लिए कई उपाय भी किए हैं। हालांकि अभी भी देश में आर्थिक सुस्ती है लेकिन जल्द ही देश इस से उभर जाएगा।

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20 रुपए का नया नोट – वैसे तो मोदी सरकार ने नोटबंदी के बाद 2000 के नए नोट जारी किए जिसके बाद 200 और 100 रुपए के भी नए नोट जारी किए गए थे। लेकिन इस साल भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने देशवासियों को 20 रुपए के नए नोटों का तोहफा दिया। 20 रुपए के नए नोट जारी होने के साथ ही इस पूरे साल 2000 के नोटों के बंद होने की अफवाह उड़ती रही।

बैंकों का विलय – इस साल बैंकिंग सेक्टर का भी हाल बेहद बुरा रहा। इसी वजह से सरकार ने बैंको की स्थिति को सुधारने के लिए कई बड़े फैसले लिए। इन फैसलों में सबसे बड़ा फैसला था बैंकों का विलय। सरकार ने 10 बैंकों का विलय कर 4 बड़े बैंक बनाने का फैसला लिया। इस फैसले के बाद देश में सरकारी बैंको की संख्या अब 12 रह गई है। हालांकि बैंकों के विलय के बाद भी कर्मचारियों की छंटनी नहीं की जाएगी। (Flashback 2019)

GST में बदलाव – चूंकि देश में आर्थिक सुस्ती का दौर चल रहा है और सरकार ने इससे निपटने के लिए कई तरह के प्रयास किए। (Flashback 2019) इतना ही नहीं सरकार ने GST में भी कई तरह के परिवर्तन किए हैं। जैसे कि सरकार ने GST रजिस्ट्रेशन के लिए आधार अनिवार्य कर दिया है। वहीं कई वस्तुओं और सेवाओं के टैक्स स्लैब में भी बदलाव किया गया है। होटल, वाहन उद्योग, घर, रक्षा उत्पाद समेत कई अन्य वस्तुओं में सरकार ने राहत प्रदान की है। इतना ही नहीं सरकार ने GST घटाने के बाद भी वस्तुओं के दाम न घटाने वाली कंपनियों को दंडित किया। (Flashback 2019)

कॉर्पोरेट टैक्स में बड़ी राहत – गिरती हुई विकास दर और आर्थिक मंदी को देखते हुए केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस साल सितंबर माह में कॉर्पोरेट टैक्स में कटौती की घोषणा की। कॉर्पोरेट टैक्स (Corporative tax) में कटौती के अलावा कैपिटल गेन पर सरचार्ज ख़त्म करने का भी ऐलान किया गया। इसके अलावा कंपनियों के लिए आयकर दर को भी घटा दिया गया और उसे 25.17 प्रतिशत कर दिया गया। सरकार के इस कदम से कंपनियों और उद्योगपतियों को बड़ी राहत मिली।

टॉप पर शेयर बाजार – इस साल जहां देश आर्थिक मंदी के दौर से गुजर रहा है और GDP अपने सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई है वहीं शेयर बाजार में लगातार तेजी लोगों को हैरानी में डाल रही है। इस साल BSE और NSE दोनों ने ही बेहद जबरदस्त प्रदर्शन किया है। इस साल सेंसेक्स 40 हजार का आंकड़ा पार कर गया तो निफ़्टी भी 12 हजार के आंकड़े पर पहुंच गया। इस बार सेंसेक्स ने नया इतिहास रच डाला और 41 हजार के पार पहुंचने में कामयाब रहा। इस साल पेट्रोलियम, आईटी, सुगर सेक्टर में निवेश करना बेहद ही फायदे का सौदा साबित हुआ जबकि बैंकिंग, एनबीएफसी, ऑटोमोबाइल का सौदा नुकसानदायक साबित हुआ। विश्लेषकों का मानना है कि इस बार शेयर बाजार की दिशा बजट तय करेगा। अगर देश की GDP में इजाफा नहीं होता है तो शेयर बाजार पर इसका असर पड़ सकता है।

बढ़े सोने-चांदी के दाम – चूंकि इस साल देश में आर्थिक सुस्ती का दौर रहा और आर्थिक सुस्ती के गहराने की आशंका के चलते सोने व चांदी की कीमतों में तेजी का रुख रहा। सोने के दाम इस साल जहां 40 हजार के पार पहुंचे वहीं चांदी के दाम भी 52 हजार के पार पहुंच गए। बता दें कि नए साल की शुरुआत से यानी 1 जनवरी 2020 से बाजार में हालमार्क वाला सोना ही बिकेगा।

महंगाई – इस बार जहां देश को आर्थिक मंदी के दौर से गुजरना पड़ा वहीं इस बार महंगाई ने लोगों को खूब रुलाया। प्याज के दाम ने तो सभी की आंखों में आंसू ही ला दिए। हालांकि सरकार ने प्याज के दामों को नियंत्रण करने का बेहद प्रयास किया लेकिन सरकार के सभी प्रयास विफल होते नज़र आए। कहीं-कहीं तो प्याज के दाम 200 रुपए किलो तक पहुंच गए। गौरतलब है कि इस बार महंगाई दर पिछले तीन सालों की तुलना में सबसे ज्यादा रही।

निचले स्तर पर GDP – मौजूदा मोदी सरकार (Modi Government) ने देश की अर्थव्यवस्था को 5 ट्रिलियन तक ले जाने का दावा किया था लेकिन गिरती हुई GDP मोदी सरकार के इस दावे की पोल खोलती हुई दिखाई दे रही है। गौरतलब है कि साल 2019 की तिमाही में विकास दर (GDP) गिरकर 4.5 पर आ गई है। यह विकास दर 26 तिमाहियों के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई है। पिछले वर्ष की सामान तिमाही की बात की जाए तो विकास दर 7.0 थी। हालांकि इस ग्रोथ रेट को बढ़ाने के लिए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कई प्रयास किए हैं।

टोल नाकों पर फास्टैग अनिवार्य – साल 2019 जहां व्यापार के लिहाज से ठीक नहीं रहा वहीं यह जाते-जाते वाहन चालकों को भी तगड़ा झटका देकर गया। दरअसल यातायात के नियम तो पहले ही बदल दिए गए थे वहीं अब राष्ट्रीय राजमार्गों के सभी टोल नाकों पर टैक्स का भुगतान फास्टैग से अनिवार्य कर दिया गया है। जिन वाहनों पर फास्टैग नहीं होगा उनसे दोगुना टैक्स वसूला जाएगा। हालांकि इससे लोगों का समय भी बचेगा और उन्हें टोल नाकों पर रुकने की जरूरत भी नहीं होगी। इसके अलावा फास्टैग से ईंधन भरने, पार्किंग का शुल्क भरने आदि की सुविधा भी सरकार जल्द ही शुरू करने जा रही है। मिली जानकारी के अनुसार ऐसा भी कहा जा रहा है कि साल 2020 में उन गाड़ियों का बीमा नहीं किया जाएगा जिन पर फास्टैग नहीं लगा हो।

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Prabhat Jain

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