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मोदी राज में अंतिम सांस लेती अर्थव्यवस्था

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देश में आर्थिक मंदी का दौर लगातार जारी है वहीं भारत की अर्थव्यवस्था भी चरमराती जा रही है। बीते माह यानी अक्टूबर में 8 बड़े और प्रमुख उद्योगों का उत्पादन भी गिरकर माइनस में चला गया है। इन उद्योगों का उत्पादन अब माइनस 5.8 फीसदी पर जा पहुंचा है। अक्टूबर से पहले सितंबर माह में यह उत्पादन माइनस 5.2 फीसदी था। वहीं कोर सेक्टर की बात की जाए तो यह पिछले 10 सालों के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है। कहने का मतलब यह यह है कि बीते 10 सालों में इन उद्योगों का प्रदर्शन इतना खराब नहीं रहा जितना आज हो गया है।

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बता दें कि कोर सेक्टर में जो 8 प्रमुख उद्योग शामिल हैं वे कोयला, कच्चा तेल, प्राकृतिक गैस, स्टील, सीमेंट, बिजली, फर्टिलाइजर और रिफाइनरी उत्पादन उद्योग हैं। इन 8 प्रमुख उद्योगों का आईआईपी की गणना में 40.27 फीसदी योगदान सम्मलित होता है। वैश्विक पटल पर स्थिति काफी बिगड़ती जा रही है जिससे निजी निवेश और उपभोक्ता मांग में कमी आ रही है। इस वजह से अब देश की आर्थिक वृद्धि दर गिरकर 5 फीसदी पर आ गई है। आर्थिक वृद्धि दर 5 फीसदी पिछले 6 सालों की तुलना में सबसे कम है।

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इस दौरान केवल फर्टिलाइजर्स सेक्‍टर के उत्पादन में बढ़त दर्ज की गई है। जबकि कोल सेक्टर, क्रूड ऑयल सेक्टर, इलेक्‍ट्रिसिटी सेक्टर में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है। फर्टिलाइजर्स सेक्टर का उत्पादन बीते एक साल में 11.8 फीसदी की दर से बढ़ा है। जबकि क्रूड ऑयल का उत्पादन -5.4 फीसदी से गिरकर -5.1 पर पहुंच गया है। बिजली उत्पादन की बात की जाए तो उसमे भी 12.4 फीसदी का नुकसान हुआ है। कोल सेक्टर का उतपादन भी -20.5 फीसदी से गिरकर -17.6 फीसदी रह गया है। केंद्र सरकार द्वारा शुक्रवार को राजस्व घाटे का आंकड़ा जारी किया गया। इसमें अक्टूबर माह का राजस्व घाटा 68900 करोड़ रुपए रहा जो पिछले वर्ष की सामान अवधि के दौरान 53900 करोड़ रुपए था। बीते सिर्फ 3 माह के भीतर ही जीडीपी (GDP) की दर में 0.5 फीसदी की गिरावट आई है।

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Prabhat Jain

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