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इन तरीकों से करें भविष्य के लिए बेहतर सेविंग

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आज के दौर में मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए पैसों की बचत करना सबसे बड़ी चुनौती साबित होता है। इन परिवारों को सैलरी के आने का पता भी नहीं चलता क्योंकि सैलरी आने से पहले ही पूरा बजट तैयार हो जाता है। सैलरी कब खर्च हो जाती है उन्हें पता तक नहीं चलता ऐसे में सेविंग कैसे की जाए इसे लेकर सभी परेशान रहते हैं। लेकिन यदि सही तरीके से प्लान बनाया जाए तो सभी खर्चों के बावजूद सेविंग की जा सकती है। तो चलिए जानते हैं सेविंग करने के इन्हीं कुछ उपाय के बारे में।

20 प्रतिशत की सेविंग

कई फाइनेंशियल प्लानर्स का कहना है कि हर किसी को अपने खर्चे अपनी सैलरी के 80 प्रतिशत के हिसाब से ही तैयार करने चाहिए। इसके बाद जब सैलरी आए तब उसका 20 प्रतिशत पहले ही निकल लेना चाहिए और 80 प्रतिशत ही खर्च करना चाहिए। इस तरह आप कुछ सेविंग हर माह कर सकेंगे।

रिकरिंग डिपॉजिट

अगर आपका बैंक में सेविंग अकाउंट है तो आपको बता दें कि इस पर आपको केवल साढ़े 3 से 4 प्रतिशत तक का ब्याज मिलता है जबकि यदि आप रिकरिंग डिपॉजिट (RD) करवाते हैं तो इसमें आपको आठ फीसदी तक का सालाना रिटर्न प्राप्त होता है। आरडी की सबसे बड़ी ख़ास बात यह है कि जब भी आपके पास फंड की कमी हो तो आप आरडी में किए गए पुराने निवेश से पैसे निकाल कर अपने फंड की समस्या को हल कर सकते हैं। इसके बाद जल्द से जल्द इसका भुगतान कर दें। आरडी के माध्यम से आपका पैसा ज्यादा सुरक्षित रहता है।

सिस्टेमेटिक इन्वेस्टमेंट प्लान

कई लोग निवेश के लिए शेयर बाजार में निवेश करने का विचार करते हैं लेकिन इसके जोखिमों को देखते हुए जल्द ही इसका विचार त्याग देते हैं। अगर आप ऐसा विचार कर रहे हैं तो आप सिस्टेमेटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) में निवेश कर सकते हैं। इसमें निवेश करने पर आपको अच्छा मुनाफा होगा क्योंकि इसके तहत आपका पैसा अगल-अलग सेक्टर की कंपनियों में निवेश किया जाता है। शेयर बाजार में तेजी हो या मंदी लेकिन आपका निवेश कभी बंद नहीं होता एसआईपी (SIP) सेबी और एएमएफआई द्वारा बनाए गए नियमों के आधार पर कार्य करता है। इसलिए यह सेविंग का बेहतर विकल्प साबित हो सकता है।

कंपनी डिपॉजिट

इसके अलावा आप गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFC) में भी निवेश कर सकते है। इसमें आपको एफडी से ज्यादा ब्याज मिलता है। इसके लिए आप एनबीएफसी (NBFC) और मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों में डिपॉजिट कर सकते हैं। आपका यह डिपॉजिट कंपनियों के लिए अनसिक्योर्ड लोन होता है जिसका इस्तेमाल कर कंपनियां अपना कारोबार आगे बढ़ाती हैं। हालांकि इस डिपॉजिट में निवेशकों को कोई गारंटी नहीं मिलती, लेकिन इस डिपॉजिट में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के नियम ही लागू होते हैं।

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