क्रेडिट कार्ड बिल का सेटलमेंट बन सकता है परेशानी

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अगर आप क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल करते हैं और किसी कारणवस अपने कार्ड का बिल चुकाने में असमर्थ हैं तब सेटलमेंट का विकल्प चुना जा सकता है। लेकिन याद रखें कि यदि आप सेटलमेंट का विकल्प चुनते हैं तो आपको फिर दोबारा घर, वाहन, दुकान या फिर अन्य किसी भी चीज़ के लिए लोन यानी खर्च मिल पाना बेहद ही मुश्किल होगा। इसलिए कभी भी अपने क्रेडिट कार्ड का बिल चुकाने के लिए सेटलमेंट का विकल्प न चुने।

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एक्सपर्ट बताते हैं कि यदि उपभोक्ता द्वारा काफी लंबे समय तक अपने क्रेडिट कार्ड के बिल का भुगतान नहीं किया जाता तो ऐसे में बैंक या फिर किसी तीसरे पक्ष की तरफ से सेटलमेंट (निपटारे) की पेशकश की जाती है। सेटलमेंट के तहत उपभोक्ताओं को ब्याज और जुर्माने आदि समेत कुल बिल का मात्र 30 से 50 प्रतिशत तक ही भुगतान करना होता है। ऐसे में कई लोग इसे अपना फायदा समझ कर और कर्ज से मुक्ति पाने के लिए सेटलमेंट जैसी पेशकश का जल्दबाजी से चुनाव कर लेते हैं। यह सेटलमेंट तत्काल तो लाभ दे देता है लेकिन भविष्य में हमें कई प्रकार की परेशानियां उठानी पड़ती हैं।

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कई बार कई ऐसी परिस्थितियां बन जाती हैं जिसकी वजह से उपभोक्ता कर्ज में डूब जाता है और अपने क्रेडिट कार्ड का बिल नहीं चुका पाता। अगर आप भी लंबे समय से अपने क्रेडिट कार्ड का बिल नहीं चुका पा रहे तो इसका मतलब यह नहीं है कि आप किसी भी तरह से सेटलमेंट का सहारा लें और फिर भविष्य में बड़ी मुसीबत में पड़ जाएं। सेटलमेंट को हम एक उदाहरण से समझते हैं। मान लीजिए आपके क्रेडिट कार्ड का बिल 60-70 हजार रुपए है और इसे आप काफी लंबे समय से नहीं चुका पा रहे। तो ऐसे में बैंक या फिर कोई तीसरा पक्ष आपके कार्ड के बिल के लिए सेटलमेंट की पेशकश करता है। ऐसे में सेटलमेंट के तौर पर आपको मात्र 30 से 35 हजार रुपए ही चुकाने होंगे।

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उपभोक्ता अपने फायदे को देखते हुए कर्ज से आधे में मुक्ति पाने के लिए यह सेटलमेंट कर लेते हैं। लेकिन कभी भी कोई बैंक उपभोक्ता को यह नहीं बताती कि इस तरह सेटलमेंट करने से आपकी सिविल ख़राब होती है। जो आपको भविष्य में काफी नुकसानदेह साबित होगी। भले ही आपको ब्याज ज्यादा चुकाना पड़े लेकिन रकम की व्यवस्था होने तक आप न्यूनतम बकाया राशि यानी मिनिमम ड्यू पेमेंट चुकाते रहें।

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