Video: आखिर क्यों कम हो रहा है एडवाइज़री मार्केट पर लोगों का विश्वास?

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देश में सबसे तेज़ी से उभरता एक मार्केट… एक ऐसी इंडस्ट्री, जो आज कई लोगों के मुनाफे की साथी है… इंदौर में ही 10 हज़ार कर्मचारियों को रोज़गार देने वाला एक ऐसा क्षेत्र, जिसमें आज आईटी सेक्टर से ज्यादा नौकरियां हैं…, लेकिन अब इस इंडस्ट्री पर से लोगों का विश्वास धीरे-धीरे कम होता जा रहा है, वह लगातार बदनाम हो रहा है। दरअसल, हम बात कर रहे हैं शेयर मार्केट एडवाइज़री कंपनियों की|  

प्रदेश सरकार ने जिस मंशा से राज्य की आर्थिक राजधानी में इन्फोसिस, टीसीएस और अन्य बड़ी कंपनियों आमंत्रित किया था, शायद वे भी इतने लोगों को रोज़गार उपलब्ध न करा पाए, जितने युवाओं को एडवाइज़री कंपनियां मध्यप्रदेश में रोज़गार दे रही हैं| फिर अचानक ऐसे क्या कारण रहे कि एक ऐसा क्षेत्र, जो रोज़गार की असीम संभावनाओं को अपने में समाहित किए हुए है, वह धांधलियों का अड्डा बन गया है। किसकी मिलीभगत से इस क्षेत्र पर विश्वास करने वाले भोले-भोले निवेशकों का पैसा डूब रहा है। वे कौन हैं, जो  इस इंडस्ट्री में रहने के बावजूद इसे दीमक की तरह खोखला करते जा रहे हैं। इन सभी सवालों के जवाब भी हमें जानना ज़रूरी हैं।

– इंदौर में कार्यरत लगभग 700 एडवाइज़री कंपनियों में से 90 प्रतिशत कंपनियां सेबी से रजिस्टर्ड नहीं हैं।

– कई कंपनियां, जो फ्रैंचाइज़ी मॉडल पर इस सेक्टर में काम करती हैं, वे भी सेबी की गाइडलाइन के विपरीत जाकर काम करती हैं। सेबी ने फ्रैंचाइज़ी मॉडल को अवैध घोषित कर रखा है, लेकिन फिर भी कम्पनियां ऐसा करती हैं।

– कंपनी जिस पते पर रजिस्टर्ड है, उसका कार्यालय उस पर न होकर किसी और पते पर होता है। इससे यह संदेह पैदा होता है कि आखिर कंपनियां अपनी पहचान छिपाना क्यों चाहती हैं।

– कई कंपनियों ने अपने आॅफिस के बाहर बोर्ड नहीं लगाया हुआ है, जिससे निवेशकों तक को इसकी जानकारी नहीं मिल पाती है। जब कंपनी सबकुछ सही होने का दावा करती है तो फिर उसके कर्ता-धर्ता छिपते क्यों हैं।

– कंपनियों ने खुद को ईपीएफओ और ईएसआईसी में रजिस्टर्ड नहीं करवाया है, जिससे सरकारी ख़जाने को करोड़ों का चूना लगाया जा रहा है।

– कर्मचारियों का पीएफ और ईएसआईसी जमा नहीं करते हुए कंपनियां खुले तौर पर सरकारी नियमों का उल्लंघन कर तो रही हैं। साथ ही करोड़ों रुपए केसर्विस टैक्स और जीएसटी की चोरी भी की जा रही है।

ये तमाम सारे ऐसे कारण हैं जो कि इस क्षेत्र में निवेशकों के विश्वास को कमजोर कर रहे हैं। हमारे पास ऐसी कई कंपनियों के दस्तावेज हैं, जो अपने पते पर नहीं हैं, जो करोड़ों रूपए का व्यापार बिना सेबी में रजिस्ट्रेशन करवाए कर रही हैं।  हमारे पास मौजूद बैलेंस शीट से साफ़तौर पर करोड़ों रुपए की अनियमितताएं उजागर हो रही हैं।

जानकारी के अभाव में होता है धोखा

एडवाइज़री इंडस्ट्री में धोखे का अहम कारण जानकारी का अभाव होता है। जानकारी के अभाव के कारण ग्राहक और कंपनी के कर्मचारी दोनों ही धोखे का शिकार होते हैं। किसी शिकायत को लेकर जब फरियादी पुलिस और दूसरे विभागों में पहुंचता है तो वहां से भी उसे ज़रूरी सहायता नहीं मिल पाती है। दूसरी ओर इंडस्ट्री में कार्यरत कुछ कर्मचारी, जो ऐसी धांधलियों से नावाकिफ रहते हैं, शिकायत होने पर मालिक के साथ वे भी फंस जाते हैं। ये कंपनियां बाहर से तो भव्य नज़र आती हैं, लेकिन इनके अंदर अनभिज्ञ कर्मचारी भी अनियमितताओं के शिकार हो जाते हैं। पिछले दिनों ही ‘प्राॅफिट गुरु‘ इन्वेस्टमेंट एडवाइज़री के कर्मचारी बेकसूर होते हुए भी 15 दिन से 1 महीने तक जेल में रहे थे। उनका कसूर सिर्फ इतना था कि वे एक फर्ज़ी कंपनी में काम कर रहे थे।

इन बातों का रखें ख़्याल

इस क्षेत्र में फैलते धोखाधड़ी के धीमे ज़हर से ग्राहक और कर्मचारी दोनों का ही नुकसान हो रहा है। एक इंडस्ट्री, जिसे बाज़ार में हमेशा विश्वास की नज़रों से देखा गया है, उस क्षेत्र की नाकामियों कोे भी हमें ही उजागर करना होगा। यदि एक कर्मचारी होने के नाते आप किसी एडवाइज़री इंडस्ट्री में काम करने जा रहे हैं तो आपको सभी बातों की पड़ताल करनी होगी। जिस तरह से एक ईमानदार कंपनी अपने कर्मचारियों का चयन करती है, उसी तरह एक ईमानदार कर्मचारी को भी अपनी कंपनी का चयन करना चाहिए। यदि शरीर में कहीं कोई घाव है तो उसका उपचार भी ज़रूरी है और इसके लिए दवाई सिर्फ जागरूकता ही हो सकती है।

हम देंगे आपका साथ

यदि आपके पास भी एडवाइज़री इंडस्ट्री में हो रही धांधलियों की जानकारी है, यदि आप भी ऐसी ही किसी धोखाधड़ी का शिकार हुए हैं, तो आप हमें इसकी शिकायत [email protected] पर कर सकते हैं। हम आपकी शिकायत संबंधित विभाग के उच्चतम स्तर तक पहुंचाएंगे ताकि फिर कोई इस तरह से धोखे का शिकार न हो।

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