रेल की रफ़्तार पर लगा कोहरे का ब्रेक

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सर्दी का मौसम शुरू होते ही रेलवे को सुरक्षा के लिहाज से अपनी रेल परिचालन व्यवस्था में बदलाव करना पड़ता है। इस बदलाव से यात्रियों को परेशानी का सामना भी करना पड़ता है लेकिन यह बदलाव भी बेहद आवश्यक है। चूंकि सर्दी के मौसम में कोहरे की वजह से विजिबिलिटी कम होने जाने से दुर्घटना की आशंका बढ़ जाती है और कोहरे के कारण रेल हादसों में इजाफा होता है। इस वजह से रेलवे अपने यात्रियों के सुरक्षित सफर के लिए परिचालन व्यवस्था में बदलाव करती है।

इस साल 3 महीनों  तक रेलवे उन जोन में करीब 20 प्रतिशत ट्रेनों को रद्द करने जा रहा है जहां पर कोहरे की अधिकता होती है। अगर आप भी रेल यात्रा करने जा रहे हैं तो सावधान हो जाएं क्योंकि कोहरे से अत्यधिक प्रभावित जोन में जहां कई ट्रेने रद्द की जाएंगी वहीं दूसरे अन्य जोन में ट्रेनों की रफ़्तार भी धीमी रखी जाएगी। रेलवे की तरफ से निर्देश जारी कर सर्दियों के मौसम में ट्रेनों की रफ़्तार को कम रखने को कहा गया है। जिन क्षेत्रों में कोहरे की वजह से विजिबिलिटी बेहद कम हो जाती है उन क्षेत्रों में ट्रेन की रफ़्तार को 15 से 60 किमी. प्रति घंटे रखने का निर्देश रेलवे की तरफ से जारी किया गया है।

हालांकि रेल मंत्रालय ने कोहरे से होने वाली इस परेशानी से निपटने के लिए एक्शन प्लान तो तैयार किए हैं लेकिन फिर भी रेलवे सावधानी पर ही जोर दे रहा है। फिलहाल रेलवे कोई भी आधुनिक तरीके नहीं ढूंढ पाई है जिससे कोहरे में विजिबिलिटी को बढ़ाया जा सके। रेल मंत्र्यालय द्वारा ट्रेन प्रोटेक्शन वार्निंग सिस्टम और एन्टी कोलिजन डिवाइस टेस्ट भी किया गया लेकिन इसमें सफलता नहीं मिलने के कारण रेलवे ने सभी जोन को रफ़्तार नियंत्रण रखने के निर्देश जारी किए हैं। वहीं रेल मंत्रालय ने कोहरे में भी सफर को सुरक्षित रखने के लिए कर्मचारियों व स्टाफ को ट्रेनिंग देना भी शुरू कर दी है।

 

 

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