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शिक्षा के क्षेत्र में फीका रहा बजट

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वित्तमंत्री ने वर्ष 2018 के बजट में किसानों को अधिक महत्व दिया है| अन्य क्षेत्रों के अलावा शिक्षा की बात करें तो इस क्षेत्र के लिए बजट कुछ खास नजर नहीं आ रहा है| इस वर्ष के बजट में शिक्षा क्षेत्र में कुल 85 हजार 10 करोड़ रुपए का आवंटन किया है, जो पिछले वर्ष के संशोधित बजट से मात्र 3141 करोड़ ही अधिक है| इस तरह देश के शिक्षा बजट में इस साल महज 3.69 फीसदी का ही इजाफा हुआ|

इसी के साथ वित्तमंत्री ने शिक्षा क्षेत्र के लिए किसी बड़ी योजना का भी ऐलान नहीं किया| देश के उच्च शिक्षा संस्थानों में रिसर्च से जुड़ी अधोसंरचनाओं को सुधारने के लिए वित्त मंत्री ने नए अभियान राइज (रिवाइटलाइजिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर एंड सिस्टम्स इन एजुकेशन) को शुरू करने का ऐलान किया है। इसके तहत अगले चार साल में उच्च शिक्षा संस्थानों के अधोसंरचना सुधारने के लिए एक लाख करोड़ रुपए निवेश किए जाएंगे| यह निवेश हायर एजुकेशन फाइनेंसिंग एजेंसी (हीफा) के जरिये किया जाएगा|

तकनीकी के क्षेत्र में रिसर्च को बढ़ावा देने के लिए वित्तमंत्री ने प्राइम मिनिस्टर्स रिसर्च फेलो स्कीम को मंजूरी दी है| इस योजना के तहत देशभर से एक हजार बीटेक छात्र-छात्राओं को आईआईटी में रिसर्च के लिए चुना जाएगा|

आदिवासी बाहुल्य क्षेत्रों में बेहतर स्कूली शिक्षा के लिए वित्तमंत्री ने वर्ष 2022 तक 50 फीसदी आदिवासी जनसंख्या वाले ब्लॉक्स में एक एकलव्य स्कूल खोलने की घोषणा की है| यह स्कूल नवोदय विद्यालयों की तर्ज पर खोले जाएंगे| वित्तमंत्री ने आईआईटी और एनआईटी में 18 नए स्कूल ऑफ प्लानिंग और आर्किटेक्चर खोलने की भी घोषणा की है| प्री-नर्सरी से लेकर 12वीं तक एक ही शिक्षा निति लागू होगी| हर बच्चे तक सरकारी शिक्षा पहुंचने की योजना है|

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