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अब भूरिया के समर्थकों ने संभाला मोर्चा

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मध्यप्रदेश में बीते 13 सालों से भी ज्यादा समय से काबिज शिवराज सरकार को उखाड़ फेंकने के लिए कांग्रेस के नेता भले ही दंभ भर रहे हो| भले ही कांग्रेस का केंद्रीय नेतृत्व सभी नेताओं के एकजुट होकर चुनाव में दम दिखाने के दावे कर रहा हो, लेकिन मध्यप्रदेश में जमीनी हकीकत की परतें धीरे-धीरे खुलने लगी हैं|

प्रदेश के जितने भी बड़े कांग्रेसी नेता हैं, वे इन चुनावों में अपना शक्ति प्रदर्शन करने से चूकना नहीं चाहते हैं| इस कारण प्रदेश संगठन को ऐन वक़्त पर मुंह की खानी पड़ सकती है| कांग्रेस में सबसे पहले मुख्यमंत्री की दौड़ में सिर्फ दो नेताओं के नाम थे| ये नेता थे ज्योतिरादित्य सिंधिया और कमलनाथ| इसके बाद नर्मदा परिक्रमा के बाद दिग्विजयसिंह का नाम भी धीरे से इस फेहरिस्त में जोड़ दिया गया, जबकि दिग्गी इस बारे में पहले ही इनकार कर चुके हैं| बाकी सारे बड़े नेता चाहे वह अजयसिंह हो या अरुण यादव, सभी आलाकमान के इशारे पर चुनाव लड़ने की बात कह रहे हैं|

अब राजनीति में कब किसकी महत्वाकांक्षा जाग जाए, इस बारे में कुछ कहा नहीं जा सकता है| हाल ही में भोपाल कांग्रेस कार्यालय के बाहर कुछ पोस्टर देखे गए| इन पोस्टर पर लिखा था ‘अबकी बार भूरिया सरकार’ यानि अब भूरिया ने भी चुनाव के लिए पांसा फेंक दिया है| कुछ दिनों पहले तक जो भूरियाजी अपने संसदीय क्षेत्र को बचाने के लिए संघर्ष कर रहे थे, वही अब प्रदेश का मुखिया होने का ख्वाब भी देख रहे हैं| अब देखना होगा कि अलग-अलग धड़ों के साथ कांग्रेस प्रदेश में कैसे चुनाव लड़ पाएगी|

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