2 करोड़ युवा तय करेंगे प्रदेश की सरकार

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आगामी विधानसभा चुनाव में युवाओं की सबसे बड़ी भूमिका होगी| युवाओं का जिस दल की तरफ झुकाव होगा, सरकार उसी दल की बनेगी। ऐसे में भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दलों ने अब युवाओं को लुभाना शुरू कर दिया है| दोनों ही दलों के नेता युवाओं के माध्यम से सत्ता के करीब पहुंच रहे हैं|

प्रदेश के 5 करोड़ मतदाताओं में से करीब आधी आबादी 35 साल से कम उम्र वालों की है। इनमें भी करीब तीस लाख ऐसे युवा हैं, जो इस चुनाव में पहली बार अपने मताधिकार का उपयोग करेंगे। 18 साल के इन युवाओं का क्या रुख रहेगा, किस दल और नेता के प्रति इनका झुकाव हो सकता है,  यह सब फिलहाल अंधेरे में है। राज्य में युवाओं की इसी बड़ी मौजूदगी और ताकत का फायदा राजनीतिक दल उठाना चाहते हैं|

सत्ताधारी दल भाजपा ने युवाओं को रिझाने के लिए मैदानी कसरत पहले से शुरू कर दी है। वहीं प्रमुख विपक्षी पार्टी कांग्रेस भी युवाओं को कहीं न कहीं घोषणा-पत्र या सम्मेलन के माध्यम से युवाओं को जोड़ने की जुगत में है|

44 प्रतिशत से ज्यादा हैं युवा मतदाता

प्रदेश में कुल मतदाताओं की संख्या 5 करोड़ 8 लाख से ज्यादा है। इनमें 35 साल से नीचे वाले मतदाताओं की संख्या 2 करोड़ 24 लाख के करीब है, जो कुल मतदाताओं का 44.10 प्रतिशत होता है। इन युवा मतदाताओं की अपनी अलग सोच है। यह वर्ग ऐसा है, जो न तो लच्छेदार भाषणों पर यकीन करता है और न ही किसी लालच में इन्हें रिझाया जा सकता है। सोशल मीडिया पर सर्वाधिक सक्रियता इसी आयु वर्ग की है।

एक साल से सक्रिय है भाजपा

युवा मतदाताओं की संख्या के मद्देनजर भाजपा संगठन हर कार्यक्रम में युवाओं की भागीदारी तय करके चल रही है। 14 जुलाई को उज्जैन से शुरू होने वाली मुख्यमंत्री की ‘जनआशीर्वाद यात्रा’ में युवा मोर्चा को जिम्मेदारी सौंपी गई है। युवाओं की भीड़ जुटाने के साथ हर जिले में यात्रा से पूर्व युवा मोर्चा युवाओं को एकजुट करेगा। भाजपा ने पिछले एक साल में युवा मोर्चा को ऐसे ही कार्यक्रम दिए, जिनसे युवा सीधे जुड़ सकें। युवा जोड़ो अभियान के तहत पूरे प्रदेश में विजय संकल्प यात्रा निकाली गई थी। नलखेड़ा से शुरू हुई इस यात्रा का समापन पिछले माह छिंदवाड़ा में हुआ था। इससे पूर्व मोर्चा ने ‘हमारे दीनदयाल’ नाम से सामान्य ज्ञान परीक्षा का आयोजन भी किया था।

कांग्रेस को पहचान का संकट

युवा मतदाताओं में सबसे चौंकाने वाला आंकड़ा 18 साल की उम्र वालों का है। पहली बार मताधिकार का उपयोग करने वाले मतदाताओं की संख्या 30 लाख 46 हजार 822 है यानी मतदाताओं के कुल प्रतिशत का 6.50 प्रतिशत। यही वह आंकड़ा है, जो सरकार का खेल बना और बिगाड़ भी सकता है। कांग्रेस नेताओं के सामने सबसे बड़ा संकट इन मतदाताओं के सामने पहचान का है। जब से इन युवाओं ने होश संभाला, तभी से भाजपा की सरकार देख रहे हैं। क्रिकेट और आकर्षक व्यक्तित्व की बदौलत ज्योतिरादित्य सिंधिया की पहचान इन युवाओं में जरूर है, पर ये युवा कमलनाथ को नहीं जानते, दिग्विजयसिंह की पहचान इनकी नजर में गलतबयानी करने वाले नेता के रूप में है| ऐसे में कमलनाथ अपनी पार्टी के अंदर विवादों को दूर करते हुए कांग्रेस को तो मजबूत कर रहे हैं, लेकिन युवाओं के बीच कांग्रेस को पहचान का संकट ही है|

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