आदिवासी यात्रा बनेगी कांग्रेस-भाजपा के लिए रोड़ा

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मध्यप्रदेश चुनाव से पहले यात्रा निकालना राजनीतिक पार्टियों का नया फैशन बन गया है। जहां भाजपा वोट और अपनी योजनाओं के प्रचार-प्रसार के लिए जनआशीर्वाद यात्रा पर निकले हैं, वहीं कांग्रेस ने भाजपा के शासनकाल और घोषणाओं की पोल खोलने के लिए जनजागरण अभियान यात्रा में पूरी जान लगा दी है। अब इन दोनों पार्टियों को रोकने के लिए एक और यात्रा निकलने वाली है। आदिवासी युवा शक्ति संगठन ‘जयस’ आदिवासी समुदायों को जागरूक करने के लिए आदिवासी अधिकार यात्रा शुरू करने जा रही है। यह यात्रा रतलाम से शुरू होगी, जो मालवा निमाड़ की आदिवासी सीटों से होते हुए महाकौशल पहुंचेगी।

जयस के जिला संरक्षक डॉ.अभय ओहरी ने कहा कि पांच वर्ष पहले सूचना के अधिकार में जानकारी मांगी तो पता चला कि देश में 1 लाख से अधिक पद बैकलॉग के खाली पड़े हैं। अब फिर जानकारी मांगी तो पता चला कि भरने के बजाय 1 लाख 40 हजार पद खाली पड़े हैं। उन्होंने कहा कि बेरोजगारी बढ़ रही है, लेकिन सरकार सुन नहीं रही है। सरकारी निर्माण नहीं होने के कारण मजदूरी भी नहीं मिल रही। इसके कारण निजी ठेकेदार के यहां कम दाम पर मजदूरी करनी पड़ रही है।

जयस के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. हीरा अलावा ने कहा भाजपा-कांग्रेस चुनावी लाभ के लिए यात्रा निकाल रहे हैं, लेकिन हम आदिवासी समाज को उसका हक़ दिलाने के लिए यात्रा निकाल रहे हैं।

पढ़ा-लिखा आदिवासी वर्ग जयस के साथ

जयस के प्रभाव में युवा और पढ़ा-लिखा आदिवासी वर्ग ज्यादा है। मालवा से महाकौशल तक बड़ी फौज सोशल मीडिया के माध्यम से जयस से जुड़ी हुई है। गोंडवाना स्टूडेंट यूनियम भी जयस के अभियान में साथ देगी। रतलाम से शुरू होने वाली इस आदिवासी अधिकार यात्रा में युवाओं की बड़ी हिस्सेदारी रहेगी।

जयस की ये है मांग

जयस की मांग है कि 5वीं अनुसूची के सभी प्रावधानों को सख्ती से लागू किया जाए। वन अधिकार कानून 2006 के सभी प्रावधानों को धरातल पर लागू किया जाए। वहीं जंगल में रहने वाले आदिवासियों को स्थायी पट्टा दिया जाए।

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