इंदौर: इस बार व्यापारी बिगाड़ेंगे गणित

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इस विधानसभा चुनाव में व्यापारी वर्ग भी अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। यही कारण है कि चुनाव के कुछ माह पूर्व से ही कांग्रेस और भाजपा दोनों ही दलों ने व्यापारियों को साधना शुरु कर दिया था। पहले भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने प्रदेशभर के व्यापारियों के साथ अलग-अलग कार्यक्रमों में मुलाकात की तो वहीं कांग्रेस के नेताओं ने भी कार्यक्रमों के जरिये उनकी नब्ज़ टटोलने की कोशिश की।

इसी कड़ी में प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर में भी व्यापारियों के बीच दोनों ही दलों के बड़े नेता पहुंचे क्योंकि सभी को पता है कि इंदौर के व्यापारी किसी भी दल की जीत में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं इसलिए भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने राजबाड़ा की तंग गलियों में होते हुए अपना रोड शो किया था। वहीं बाद में राहुल गांधी ने भी व्यापारियों से अलग से मुलाकात की थी।

इन सभी कवायदों के पीछे रणनीति यही थी कि यदि व्यापार की नगरी में व्यापारियों को साथ कर लिया जाए तो चुनाव काफी हद तक सरल हो सकते हैं, लेकिन इसके उलट इंदौर में व्यापारियों के मन में इस बार कुछ और ही चल रहा है।

बीते कुछ महीनों पूर्व से ही व्यापारियों के बीच भी इस बात की मंत्रणा शुरू हो गई थी कि इस बार आखिर किसे वोट दिया जाए क्योंकि व्यापारियों को इन पांच सालों के दौरान कई बार परेशानियों का सामना करना पड़ा था।

जब सराफा व्यापारियों पर एक्साइज ड्यूटी केंद्र सरकार द्वारा लगाई गई थी तो सराफा व्यापारियों ने करीब 2 महीनों तक इसका विरोध किया था, लेकिन उनका यह विरोध बेनतीजा ही रहा। इसके अलावा कई अन्य मुद्दों पर भी सरकार ने व्यापारियों को परेशान किया। उसमें नोटबंदी के दौरान व्यापारियों को जिस तरह की परेशानी आई, इसके  बाद जीएसटी के नए नियमों में भी व्यापारी उलझकर ही रह गए थे।

इन सभी परेशानियों को याद करते हुए व्यापारी वर्ग अब अपने हित में कुछ सोच रहा है। हालांकि व्यापारियों के मन में क्या खिचड़ी पक रही है, यह तो कोई नहीं जानता, लेकिन उनका वोट इस चुनाव में बड़ा बदलाव कर सकता है।

-पॉलिटिकल डेस्क

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