टिकटार्थी संगठन की जिम्मेदारी से मुक्त

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मध्यप्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर भाजपा रणनीति के तहत काम कर रही है| पार्टी उन नेताओं को संगठन की जिम्मेदारी से मुक्त कर रही है, जो आने वाले विधानसभा चुनाव में टिकट लेकर चुनाव में अपना भाग्य आजमा सकते हैं| अब तक पार्टी ने करीब 10 जिलाध्यक्षों को पार्टी संगठन के काम से मुक्त कर दिया है|

दर्जन भर क़तार में

पार्टी कार्यालय से मिल रही जानकारी के अनुसार, विधानसभा चुनाव लड़ने के इच्छुक करीब दर्जनभर नेताओं ने अब तक संगठन की जिम्मेदारी से मुक्त होने की इच्छा ज़ाहिर की है| बताया जा रहा है कि पार्टी पहले ऐसे नेताओं को लेकर एक सर्वे करवाएगी| यदि पार्टी को ऐसा लगता है कि चुनावी रिपोर्ट इन नेताओं के पक्ष में आते हैं तो आने वाले दिनों में कुछ नेताओं को भी संगठन के काम से मुक्त किया जाएगा।

संशय में हैं कई नेता

भाजपा के अनेक नेता इन दिनों संशय की स्थिति में हैं| जो नेता संगठन की कमान संभाले हुए हैं, उनमें से ज्यादातर चुनाव में अपना भाग्य आजमाना चाहते हैं| कुछ नेताओं को पार्टी पहले ही बता चुकी है कि उनकी जीत की गुंजाइश को देखकर निर्णय किया जाएगा जबकि पार्टी नेता अंदरूनी तौर पर जिलाध्यक्षों को टिकट नहीं देने के संकेत दे रहे हैं|

नेताओं ने की लॉबिंग शुरू

पार्टी के बदले फैसलों के बीच संगठन में काम कर रहे नेताओं ने लॉबिंग शुरू कर दी है| नेताओं का कहना है कि उन्हें विधानसभा चुनाव में टिकट दिया जाना चाहिए| विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए आतुर इन नेताओं ने अपने नेताओं के माध्यम से टिकट के लिए लॉबिंग शुरू कर दी है | पार्टी ने पिछले चार माह में ही देवास, खरगोन, जबलपुर ग्रामीण, सीधी, नरसिंहपुर, बैतूल, विदिशा, राजगढ़, इंदौर शहर और उज्जैन पदाधिकारी हटाए हैं। अब ये सभी विधानसभा में टिकट की जुगाड़ में जुट गए हैं |

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