टिकट वितरण में सर्वे होगा बड़ा आधार

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आगामी मध्यप्रदेश चुनाव में जहां शिवराज सरकार अपने विजयी रथ को बरकरार रखने के लिए चुनावी मैदान में उतरेगी वहीं दूसरी ओर कांग्रेस शिवराज के रथ को धराशायी करने के लिए मैदान में उतरेगी। कांग्रेस प्रदेश में 15 साल का वनवास खत्म कर सत्ता हासिल करने में जुटी है वहीं भाजपा चौथी बार सरकार बनाने के लिए प्रत्याशियों के चयन में खासी ऐहतियात बरतेगी।

भाजपा करवा चुकी तीन सर्वे

भाजपा अब तक तीन सर्वे करवा चुकी है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, चौथा और आखिरी सर्वे जुलाई माह में हो सकता है। इस सर्वे के बाद ही प्रत्याशी के चयन पर विचार होगा। वहीं कांग्रेस भी क्षेत्रों में किसकी सक्रियता है और कौन बाजी मार सकता है, इसका आकलन करवा चुकी है। कहा जा रहा है कि सर्वे के परिणामों के आधार पर ही इस बार टिकटों का वितरण होगा।

जीतने वाले चेहरे को टिकट

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ पहले ही कह चुके हैं कि इस बार चुनाव में जीतने वाले चेहरे को ही विधानसभा चुनाव में उतारा जाएगा। वहीं पिछले दिनों भाजपा प्रदेश अध्यक्ष राकेशसिंह ने भी लगभग यही कहा था कि जीतने वाले प्रत्याशियों को टिकट दिया जाएगा।

अंदरूनी सर्वे ने बढ़ाई भाजपा की चिंता

हाल ही में आरएसएस के सर्वे ने भाजपा की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। आरएसएस के सर्वे में 60 से 70 विधायकों के टिकट कटने की संभावना है। ये वे विधायक हैं, जो पार्टी और सरकार के निर्देश के बाद भी जनता से दूर रहे। केंद्र और राज्य की योजनाओं को जनता के सामने पहुंचाने में नाकाम रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, कई बड़े नेताओं के टिकट भी कटेंगे, जिनकी किसी को उम्मीद न हो। बता दें कि इससे पहले भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के सर्वे में भी प्रदेश के लगभग 100 से ज्यादा विधायकों पर हार का खतरा मंडराता दिख रहा है।

प्रत्याशियों की घोषणा में देर नहीं

खास बात यह है कि दोनों ही पार्टियां प्रत्याशियों की घोषणा में ज्यादा देर नहीं करने वाली। कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ ने सितंबर तक प्रत्याशियों की सूची जारी करने की बात कही है। भाजपा की भी इसी तरह की तैयारियां बताई जा रही है। दावेदारों ने भी अपनी सक्रियता बढ़ा दी है। क्षेत्र में सक्रिय नजर आ रहा दावेदार बड़े नेताओं के दरवाजे पर भी दस्तक दे रहे हैं।

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