खुद की सीट बचाने में लगे स्टार प्रचारक

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मध्यप्रदेश में चुनावी घमासान जारी है और दोनों ही दल तूफानी गति से अपने प्रचार में लगे हैं, लेकिन मुश्किल की बात तो उन दिग्गज नेताओं के लिए है, जो पार्टी के स्टार प्रचारक हैं। जहां एक ओर प्रत्याशियों की मांग राष्ट्रीय स्टार प्रचारकों की है वहीं उनकी दूसरी पसंद दिग्गज नेताओं की है। अब ऐसे में जिन दिग्गजों पर स्टार प्रचारक का ठप्पा लगा है, उन्हें अपनी ही सीट बचाने के लिए जद्दोजहद करनी पड़ रही है। स्टार प्रचारक होने के साथ-साथ ये दिग्गज नेता खुद भी चुनाव का हिस्सा हैं। फिर बात चाहे भाजपा की हो या कांग्रेस की, दोनों ही दल के दिग्गजों को अपनी सीट बचाने की परेशानी है।

नरोत्तम मिश्रा

शिवराज सरकार के सबसे शक्तिशाली मंत्रियों में शुमार और पार्टी के स्टार प्रचारक नरोत्तम मिश्रा पूरे चुनाव प्रचार के दौरान अपना ही प्रचार करते  नज़र आए। चूंकि स्टार प्रचारक होने के नाते वे अन्य प्रत्याशियों के लिए प्रचार कर रहे हैं, लेकिन उनका ध्यान अपनी सीट पर टिका हुआ है। नरोत्तम मिश्रा के सामने कांग्रेस के प्रत्याशी राजेंद्र भारती मैदान में हैं और पिछले 2 बार से हार झेल रहे भारती इस बार पूरी तैयारी के साथ मिश्रा को कड़ी टक्कर दे रहे हैं। दूसरी ओर दतिया सीट से लड़ रहे बीएसपी प्रत्याशी ने कांग्रेस में शामिल होकर मिश्रा की मुश्किलों को दोगुना कर दिया है।

यशोधरा राजे  

सिंधिया घराने से संबंध रखने वाली भारतीय जनता पार्टी की स्टार प्रचारक यशोधराराजे शिवपुरी सीट से चुनावी मैदान में हैं। वैसे यशोधरा की ग्वालियर चंबल इलाके में अच्छी पकड़ है, लेकिन इस बार जातीय और क्षेत्रीय समीकरणों के कारण उनकी सीट संकट में है और वे दूसरे प्रत्याशियों की जगह खुद का प्रचार करने पर मजबूर हैं।

बाबूलाल गौर

पूर्व मुख्यमंत्री और पार्टी के स्टार प्रचारक बाबूलाल गौर खुद तो चुनावी मैदान में नहीं हैं, लेकिन अपनी पारम्परिक सीट से चुनावी अखाड़े में उतरी अपनी बहू कृष्णा गौर की जीत के लिए हरसंभव प्रयत्न कर रहे हैं।

सुरेश पचौरी

कांग्रेस के स्टार प्रचारकों की सूची में शामिल सुरेश पचौरी खुद भोजपुर सीट से इस महासंग्राम में शामिल हैं। पिछले चुनाव में अपने विरोधी सुरेंद्र पटवा से हार जाने के बाद पचौरी पर पहले से काफी दबाव है। स्टार प्रचारक पचौरी के समर्थन में ही अब बड़े नेताओं को सभा करनी पड़ रही है।

अरुण यादव

पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अरुण यादव को भी कांग्रेस पार्टी ने अपना स्टार प्रचारक बनाया है, लेकिन बुधनी सीट से उनका सामना मुख्यमंत्री शिवराजसिंह से होना है। ऐसे में अरुण यादव शिवराज को पटखनी देने के लिए अपनी सीट पर प्रचार में डटे हुए हैं और शिवराज को हराने के लिए जी-तोड़ मेहनत कर रहे हैं। निमाड़ में काफी प्रभाव रखने वाले अरुण का अपनी ही सीट पर सीमित हो जाना पूरे निमाड़ में पार्टी को कमजोर बना रहा है।

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