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गठबंधन से बढ़ती ताकत

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5 राज्यों में चुनाव होने के बाद कांग्रेस ने सत्ता में आख़िरकार वापसी कर ही ली। मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में कांग्रेस की जीत का डंका आखिर बज ही गया। हालांकि राजस्थान में तो महारानी से सत्ता छीनने के लिए कांग्रेस को ज्यादा मशक्कत नहीं करनी पड़ी, लेकिन मध्यप्रदेश की सत्ता में वापसी करने के लिए कांग्रेस के पसीने छूट गए। इस कांटे की टक्कर को देखते हुए यह कहना गलत नहीं होगा कि यदि कांग्रेस ने सपा, बसपा और गोंगपा से हाथ मिला लिया होता तो उसकी जीत की राह बेहद आसान हो जाती।

चुनाव परिणामों से एक बात स्पष्ट हो गई कि मध्यप्रदेश में सपा, बसपा और गोंगपा ने खुद तो अच्छा प्रदर्शन नहीं किया, लेकिन कांग्रेस का नुकसान कर दिया। यदि ये तीन पार्टियां कांग्रेस के साथ मिलकर मैदान में उतरतीं तो यकीनन भाजपा को 50 सीटों पर ही ढेर कर देतीं। अभी के परिणामों पर नज़र डालें तो कांग्रेस के खाते में 114 सीटें हैं जबकि भाजपा को 109 सीटें ही मिली हैं और 7 सीटें ऐसी रहीं, जिन पर भाजपा को केवल 100 से लेकर 1000 मतों के अंतर से हार का सामना करना पड़ा। वहीं इन तीन पार्टियों सपा, बसपा और गोंगपा की बात की जाए तो समाजवादी पार्टी को 1 और बहुजन समाजवादी पार्टी को 2 सीट ही मिली हैं। गोंडवाना गणतंत्र पार्टी अपना खाता तक नहीं खोल सकी।

अब देखा जाए तो कई सीटें ऐसी रही जिन पर बेहद कड़ा मुकाबला रहा। इन सीटों के आकड़ों का ठीक से आकलन किया जाए तो, भाजपा ने बेहद ही कम अंतर से कांग्रेस को शिकस्त दी, वहीं तीसरे नंबर पर सपा, बसपा या गोंगपा रही। हम अमरपाटन सीट को उदाहरण के तौर पर लेते हैं तो यहां पर बीजेपी के पम्खेलावान पटेल ने कांग्रेस के दादा भाई को महज 3747 वोटों से हराया। वहीं इस सीट पर बसपा उम्मीदवार छंगेलाल कोल को 37918 वोट और गोंगपा के संतोष कुमार गुप्ता को 750 वोट मिले। अब अगर ऐसे में कांग्रेस इन दलों को साथ लेकर मैदान में उतरती तो, यक़ीनन यह सीट वह जीत जाती और वह भी काफी बड़े अंतर के साथ।

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