सिंगरौली :  अपनों से लड़ रही है कांग्रेस

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मध्यप्रदेश पूरी तरह चुनाव के माहौल में सरोबार हो गया है। सभी दलों के सिपाही मैदान में उतर गए हैं और एक-दूसरे को चुनौती दे रहे हैं। भाजपा-कांग्रेस ने टिकट बंटवारे के बाद ऐसी स्थिति पैदा कर दी है कि उन्हें विरोधियों से ज्यादा अपनों से लड़ना पड़ रहा है। प्रदेश की सिंगरौली सीट पर कांग्रेस विरोधियों से नहीं बल्कि अपनों से लड़ रही है।

कांग्रेस जिला उपाध्यक्ष अरविंदसिंह चंदेल निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में मैदान में हैं। उनके खिलाफ पैराशूट प्रत्याशी पूर्व महापौर रेनू शाह हैं। रेनू शाह बसपा का साथ छोड़कर कांग्रेस में शामिल हुई हैं। रेनू शाह का स्थानीय कार्यकर्ता विरोध कर रहे हैं। अरविंद ने साफ कर दिया है कि कांग्रेस जिला कार्यालय द्वारा 11 नाम पार्टी को सुझाए गए थे। उनमें से एक भी नाम को कांग्रेस आलाकमान ने तवज्ज़ो नहीं दी। ऐसे में पार्टी के ज़मीनी कार्यकर्ताओं के साथ विश्वासघात हुआ है। इसी कारण वह चुनावी मैदान में उतरे हैं।

कांग्रेस के नेता भूपेंद्र प्रतापसिंह पिछली बार चुनावी मैदान में थे और बाजपा के रामलल्लू वैश्य से करीब 10 हजार मतों से हार गए थे। उस समय भी बागियों ने ही कांग्रेस का खेल बिगाड़ा था। तब भूपेंद्र प्रतापसिंह के खिलाफ पार्टी के कई नेताओं ने पार्टी छोड़ दी थी। तब वरिष्ठ नेता कुंदन पाण्डेय चुनाव में थे। उन्हें चुनाव में 45,000 मत मिले थे। 2013 के चुनाव परिणामों को एक बार कांग्रेस फिर दोहराने जा रही है और इस बार अपने बागी कार्यकर्ताओं के कारण कहीं 2013 की कहानी फिर से ना रिपीट हो जाए।

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