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4,337 मतों ने बिगाड़ा ‘मामा’ का खेल

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मध्यप्रदेश की सत्ता में कांग्रेस का वनवास आखिर ख़त्म हो गया और 15 सालों के बाद प्रदेश में बदलाव की बयार चली। शिवराज मामा के हाथ से प्रदेश की बागडोर छिन गई और मामा ने भी अपना इस्तीफ़ा राज्यपाल महोदय को सौंप दिया। अब प्रदेश को जल्द ही एक नया मुख्यमंत्री मिलने वाला है। कांग्रेस अब इस दुविधा में फंसी हुई है कि आखिर किसे मुख्यमंत्री बनाया जाए। एक तरफ हैं पार्टी के दिग्गज कमलनाथ तो दूसरी तरफ हैं ज्योतिरादित्य सिंधिया। राहुल की विडंबना देखिए कि वे अभी किसी से बैर भी तो नहीं ले सकते क्योंकि लोकसभा चुनाव जो आने वाले हैं।

वहीं यदि भाजपा की बात की जाए तो यदि भाजपा को केवल 4 हजार 337 वोट और मिल जाते तो चौथी बार भी मामा प्रदेश की मुख्यमंत्री की कुर्सी पर विराजमान हो जाते। भाजपा और कांग्रेस में बेहद कड़ी टक्कर रही और भाजपा को महज 4 हजार 337 वोटों के अंतर से हार का मुंह देखना पड़ा। सिर्फ इतने से अंतर ने भाजपा को सत्ता विहीन कर दिया। प्रदेश की 7 सीटों ने भाजपा का गणित बिगाड़ दिया। सिर्फ ये 7 सीट ही ऐसीं थीं, जिन पर भाजपा को 100 से 1000 मतों के अंतर से हार मिली।

ग्वालियर दक्षिण, सुवासरा, जबलपुर उत्तर, राजनगर, दमोह, ब्यावरा और राजपुर विधानसभा सीट पर भाजपा को बेहद ही कम अंतर से शिकस्त मिली है। ग्वालियर दक्षिण से 121, सुवासरा से 350, जबलपुर उत्‍तर से उत्तर, राजनगर से 732, दमोह से 798, ब्यावरा से 826 और राजपुर (अ.ज.जा.) सीट से 932 मतों के अंतर से भाजपा को शिकस्त मिली। इन सभी को जोड़ा जाए तो 4,337 का आंकड़ा बनता है। यदि यह 7 सीट बीजेपी के झोली में जाती तो भाजपा की 116 सीटें हो जाती और वहीं कांग्रेस की 107 सीट ही रह जातीं। चौथी बार भाजपा प्रदेश में अपनी सरकार बनाने में कामयाब हो जाती।

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