जनता के यॉर्कर से बोल्ड हुए रमनसिंह

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छत्तीसगढ़ में कांग्रेस का वनवास खत्म हो गया। अपनी सौम्यता छवि के लिए जाने जाते डॉ.रमन सिंह को जनता ने नकार दिया। भाजपा 15 सीटों में सिमटकर रह गई। मुख्यमंत्री के तौर पर डॉ.रमन सिंह हैट्रिक लगाने के बाद अब विपक्ष में बैठेंगे। छत्तीसगढ़ का नाम जब लिखा जाएगा तो उसमें रमनसिंह पहले स्थान पर रहेंगे।

2003 के विधानसभा चुनाव में जीत के साथ डॉ.रमन सिंह ने छत्तीसगढ़ को संभाला। इसके बाद दो चुनाव हुए, जिसमें भाजपा जीती और मुख्यमंत्री रमनसिंह बने। धान के कटोरे में चावल वाले बाबा के नाम से मशहूर रमनसिंह छत्तीसगढ़ के इतिहास बन गए है। जिन्हें पढ़े बिना प्रदेश का किस्सा अधूरा रहेगा। रमन सरकार के पीडीएस सिस्टम की तारीफ केंद्र सरकार ने भी की थी। राष्ट्रीय स्तर पर इसे ले जाने का खाता भी तैयार किया गया।

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने संगठन क्षमता और सबको साथ लेकर चलने की दक्षता से संपन्न रमनसिंह को वर्ष 2002 में छत्तीसगढ़ बीजेपी के प्रदेशाध्यक्ष का दायित्व सौंपा था। साल 2003 में छत्तीसगढ़ में चुनाव में भाजपा को चेहरे की तलाश थी। ऐसे में 2003 के विधानसभा में डॉ.रमन सिंह के नेतृत्व में भाजपा ने जीत हासिल की। इसके बाद रमन वर्ष 2008 और 2013 में भी सफल रहे और तीसरी बार मुख्यमंत्री बने।

रमन सिंह ने सियासती मैदान में 15 वर्ष जमकर बैटिंग की। उनकी 3 पारी की खूब तारीफ भी हुई। परंतु इस बार जनता की यॉर्कर को खेल नहीं पाए और बोल्ड हो गए।

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