राजपूत समाज तोड़ देगा वसुंधरा का सपना

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राजस्थान विधानसभा चुनाव नज़दीक आते जा रहे हैं। मुख्यमंत्री वसुंधराराजे राजस्थान गौरव यात्रा पर निकली है। चुनाव से पहले ही भाजपा पर काले बादल मंडराने लगे हैं। दिग्गज नेताओं का पार्टी छोड़कर जाना और कांग्रेस को जनता से मिल रहे समर्थन ने भाजपा की परेशानी खड़ी कर दी है। इस बीच भाजपा के परंपरागत वोटर राजपूत समाज भी उनसे ख़फा दिख रहा है।

चुनाव करीब आने को है और राजपूत नेताओं के तेवर बदल रहे हैं। भाजपा के लिए हर चुनाव में राजपूत समाज वरदान रहा है, लेकिन पहली बार भाजपा के वोटबैंक के भीतर असंतोष दिखाई दे रहा है। समाज के नेता भाजपा से अपनी ताकत वापस लेते दिख रहे हैं। समाज के भीतर के तेवर साफतौर पर दिखने लगे हैं। बाड़मेर में पूर्व विदेशमंत्री जसवंतसिंह के पुत्र और विधायक मानवेंद्रसिंह ने 22 सितंबर को स्वाभिमान रैली निकालने का ऐलान कर दिया है। उनकी पत्नी चित्रा सिंह भी लगातार राजपूत के साथ अन्य समाजों के साथ बैठक कर रही हैं। वहीं जैसलमेर में पूर्व महारानी रासेश्वरी राज्यलक्ष्मी ने भी राजनीति में उतरने की तरफ इशारा कर दिया है।

वहीं जयपुर में भाजपा के प्रति नाराजगी जताते हुए राजपूत समाज ने अपना प्रत्याशी उतारने का ऐलान कर दिया है। श्री सर्व राजपूत व रावणा राजपूत समाज संघर्ष समिति के बैनर तले हुए कार्यक्रम में अध्यक्ष गिरिराजसिंह लोटवाड़ा ने यह ऐलान किया। उन्होंने साफ कहा कि वे चुनाव में भाजपा को सबक सिखाएंगे। उधर, करणी सेना भी विभिन्न मांगों को लेकर भाजपा को निशाने पर ले रही है।

राजपूत समाज इस बार भाजपा से नाराज़ है। समाज आनंदपाल एनकाउंटर,राजमहल प्रकरण, गजेंद्र सिंह शेखावत को प्रदेश अध्यक्ष नहीं बनाने के माममें में नाराज़ है। हालांकि समाज के हर आंदोलन पर सरकार को झुकना पड़ा है। लेकिन इस बार चुनाव से पहले राजपूत नेताओं के तेवर नई राजनीति की तरफ इशारा कर रहे हैं। बता दें कि प्रदेश की 30 विधानसभा सीटों पर राजपूत समाज की आबादी की महत्वपूर्ण भूमिका है। प्रदेश की जैसलमेर, बाड़मेर, जोधपुर, जालोर, चुरू, नागौर, झुंझुनू, सीकर, बीकानेर, अजमेर में आने वाली कई सीटों पर राजपूत समाज का दबदबा है।

वसुंधरा राजे की राजस्थान गौरव यात्रा पर पथराव

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