राजपरिवार का राजनीतिक सफर, 3 पीढ़ियां, 3 पार्टी

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जयपुर के राजपरिवार का राजनीतिक सफर भी कुछ अनोखा है। राजपरिवार की तीन पीढ़ियों ने तीन पार्टियों का दामन थामा है। गायत्री देवी से लेकर दीया कुमारी तक इसमें शरीक रही परंतु एक बार फिर इस परिवार के राजनीतिक सफर पर ब्रेक लग गए हैं। सवाई माधोपुर से विधायक दीया कुमारी ने दोबारा उसी सीट से चुनाव लड़ने की मंशा जताई थी, परंतु भाजपा ने सवाई माधोपुर सीट से दीया कुमारी को टिकट नहीं दिया।

राजपरिवार की गायत्रीदेवी ने जीत का रिकॉर्ड कायम किया था, जिसे अभी तक अगली पीढ़ी नहीं तोड़ पाई है। गायत्रीदेवी के बाद भवानी सिंह भी आगे बढ़े, परंतु 1989 में चुनाव हार गए। भवानीसिंह के सामने सामान्य परिवार से आने वाले गिरधारीलाल भार्गव ने चुनाव लड़ा था, जो चुनाव जीते थे।

इसके बाद तीसरी पीढ़ी के तौर पर गायत्रीदेवी की पौत्री और भवानीसिंह की पुत्री दीया कुमारी इन सब अनुभवों को आत्मसात कर अपनी दादी गायत्रीदेवी के पद चिन्हों पर चलते हुए सामाजिक कार्यों में शरीक होने लगी। 10 सितंबर 2013 को जयपुर में एक रैली के दौरान वसुंधराराजे की उपस्थिति में भाजपा का दामन थाम लिया।

साल 2013 के विधानसभा चुनावों में दीया कुमारी सवाई माधोपुर से भाजपा की टिकट पर विजयी रही। इस बार जब दीया कुमारी का भाजपा प्रत्याशियों की पहली सूची में नाम नहीं आया तो कई तरह के कयास शुरू हो गए। इसमें चर्चाएं थी कि दीया कुमारी जयपुर से सांसद का चुनाव लड़ सकती हैं या झोटवाड़ा से मौका मिल सकता है। इस बीच दीया कुमारी ने साफ कह दिया कि वे चुनाव लड़ेंगी तो केवल सवाई माधोपुर सीट से ही। इसके बाद भाजपा ने उनकी जगह अन्य दावेदार को सवाई माधोपुर से उतार दिया।

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