चुनावी माहौल में इस गांव में पसरा सन्नाटा

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राजस्थान के प्रत्येक गांव में जहां चुनावी गूंज सुनाई दे रही है वहीं हनुमानगढ़ जिले की नोहरा विधानसभा के एक गांव में पूरी तरह शांति है। यहां न कोई प्रत्याशी वोट मांगने आ रहा है और न ही गांव में किसी पार्टी का बैनर या झंडा दिखाई देता है। नोहर विधानसभा के इस गांव का नाम जसाना है। इस गांव में 17 अक्टूबर 2017 को अटल सेवा केन्द्र में ई-मित्र संचालक पवन व्यास की दिनदहाड़े नृशंस हत्या कर दी गई थी। घटना के 14 महीनों बाद भी पुलिस हत्यारों का सुराग नहीं लगा पाई। अब मामला सीआईडी-सीबीआई के पास है।

पवन व्यास के हत्यारों का पता नहीं लगने के विरोध में ग्राम पंचायत और ग्रामीणों ने इस बार मतदान बहिष्कार का फैसला लिया। अब ग्रामीण न तो किसी प्रत्याशी को गांव में घुसने दे रहे हैं और न ही अभी तक कोई भी प्रत्याशी गांव में वोट मांगने आया और न ही गांव में किसी पार्टी का कोई बैनर या झण्डा नज़र आ रहा है। पवन व्यास हत्याकांड के विरोध में न सिर्फ ग्रामीण बल्कि ग्राम पंचायत ने भी मतदान बहिष्कार कर रखा है। प्रशासनिक अधिकारियों का आलम यह है कि वे ग्रामीणों को समझाने के बजाय ग्रामीणों पर ही पाबंदी लगा रहे हैं।

मतदान बहिष्कार मामले में नोहर एसडीएम ने अब तक कई लोगों पर पाबंदी लगाई है|  दूसरी तरफ गांव में किसी भी राजनीतिक पार्टी या किसी भी प्रत्याशी का प्रचार नहीं हो रहा बल्कि ग्रामीण ऊंट पर बैनर लगाकर मतदान बहिष्कार का प्रचार ज़रूर कर रहे हैं। ऊंट को प्रतिदिन गांव और आसपास की ढाणियों में घुमाया जा रहा है।

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