23 बार की हार भी इनके सामने बेकार

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‘तूफानों से डरकर नौका पार नहीं होती और कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती’, यह पंक्ति शायद राजस्थान के 70 वर्षीय तीतरसिंह पर लिखी गई है। राजस्थान के करनपुर से 70 वर्षीय तीतरसिंह 23 बार हारने के बाद भी 24वीं बार चुनावी मैदान में हैं। तीतरसिंह उन लोगों में से हैं, जो अपनी हार का ठीकरा किस्मत या भाग्य पर नहीं फोड़ते बल्कि अपनी हार से सीख लेकर और अधिक तैयारी के साथ अगली बार प्रयास करते हैं।

चौंकाने वाली बात यह नहीं है कि तीतरसिंह 24वीं बार चुनाव लड़ रहे हैं, आश्चर्य की बात तो यह है कि तीतरसिंह मनरेगा मजदूर हैं और उनके पास धेलेभर की संपत्ति नहीं है और बिना किसी संपत्ति के वे इस बार भी चुनावी जंग में शामिल हैं। उन्हें मैदान में उतारने के लिए लोगों ने चंदा एकत्रित किया है। तीतरसिंह की इच्छा है कि उन्हें कम से कम एक बार जीत हासिल हो।

गौरतलब है कि गंगानगर निवासी तीतरसिंह 23 बार चुनाव में अपनी किस्मत आजमा चुके हैं। उन्होंने 9 बार लोकसभा और 9 बार विधानसभा चुनाव के अलावा पंचायत और नगर निगम चुनाव में भी अपना भाग्य आजमाया है। वहीं इस विधानसभा चुनाव के लिए तीतरसिंह ने 13 नवंबर को अपना नामांकन दाखिल किया, जिसमे उन्होंने संपत्ति व आपराधिक पृष्ठभूमि वाले कॉलम में कुछ नहीं लिखा है। तीतरसिंह के सिर पर जीत का जुनून इस कदर सवार है कि 23 बार चुनाव हारने के बाद भी वे 24वीं बार चुनावी मैदान में उतरे हैं। उन्हें बस एक बार चुनाव जीतने की इच्छा है।

तीतर सिंह की जिद के आगे घरवालों ने भी अब हार मान ली है और उनका समर्थन कर रहे हैं। गुलाबेवाला गांव के रहने वाले तीतर सिंह मनरेगा योजना के तहत मजदूरी करते हैं और उनकी एक दिन की कमाई महज 142 रुपए है।

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