राजस्थान चुनाव: ये सीटें कांग्रेस के लिए अभिशाप

2

राजस्थान विधानसभा चुनाव नज़दीक आते जा रहे हैं। भाजपा,कांग्रेस के साथ तीसरे मोर्चा ने चुनावी रणभूमि में उतरने के लिए अपने-अपने तलवारों को तेज़ धार देना शुरू कर दिया है। मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे जहां ‘राजस्थान गौरव यात्रा’ पर निकली हैं, वहीं कांग्रेस हमलावर भूमिका में सक्रिय है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सचिन पायलट और पार्टी महासचिव अशोक गहलोत ने पार्टी को जिताने के लिए पूरी तैयारी शुरू कर दी है। मगर राजस्थान की 8 विधानसभा सीटें ऐसी हैं, जो कांग्रेस के लिए अभिशाप बन चुकी हैं।

राजस्थान की 8 विधानसभा सीटें ऐसी हैं, जो भाजपा या निर्दलीय उम्मीदवारों का गढ़ है। प्रतापगढ़, दौसा, बाली समेत प्रदेश की करीब पांच विधानसभा सीटों पर पिछले 30 सालों से कांग्रेस ने जीत का स्वाद नहीं चखा है।

ये विधानसभा सीट कांग्रेस के लिए अभिशाप-

– प्रतापगढ़

प्रतापगढ़ विधानसभा सीट आखिरी बार कांग्रेस ने 1985 में जीती थी। उसके बाद लगातार इस सीट पर भाजपा जीत रही है। इस सीट से लगातार पांच बार भाजपा के वरिष्ठ नेता और विधायक नंदलाल मीणा जीत रहे हैं।

– बाली

बाली की सीट भी कांग्रेस ने आखिरी बार वर्ष 1985 में जीती थी। उसके बाद लगातार कांग्रेस लगातार इस सीट पर हार रही है। बाली सीट से 1993 और 1998 में पूर्व मुख्यमंत्री भैरोसिंह शेखावत ने भाजपा से जीते थे। उसके बाद लगातार तीन बार पुष्पेंद्र सिंह चुनाव जीत रहे हैं।

– जैतारण

जैतारण की सीट पर कांग्रेस के प्रतापसिंह आखिरी बार जीते थे। इसके बाद से लगातार कांग्रेस इस सीट पर चुनाव हार रही है। इस सीट पर भाजपा के दिग्गज नेता सुरेंद्र गोयल का कब्जा है। गोयल 6 चुनाव में लगातार 5 चुनाव जीते हैं, केवल साल 2008 में निर्दलीय दिलीप चौधरी से चुनाव हार गए थे।

– दौसा

दौसा भी कांग्रेस के लिए अभिशाप बना हुआ है। आखिरी बार कांग्रेस ने 1985 में चुनाव जीता था। उसके बाद से लगातार कांग्रेस को हार ही नसीब हुई है। इस सीट पर मुकाबला भाजपा, बसपा और निर्दलीय के बीच रहता है।

– कुशलगढ़

बांसवाड़ा जिले की कुशलगढ़ सीट पर छह विधानसभा चुनावों में एक बार भी कांग्रेस चुनाव नहीं जीत सकी है। यह सीट जदयू का गढ़ रहा है, लेकिन पिछले चुनाव में भाजपा ने इस सीट पर कब्जा कर लिया था।

– आसींद

भीलवाड़ा जिले की आसींद सीट पर भी कांग्रेस लगातार पांच चुनावों से हार रही है। भाजपा के रामलाल गुर्जर कांग्रेस के सामने दीवार बनकर खड़े हुए हैं।

– धोध

सीकर की धोध सीट पर 1990 से कांग्रेस कभी चुनाव नहीं जीत सकी है। धोध पर मार्क्सवादी कम्यूनिस्ट पार्टी का कब्जा है। तीन बार माकपा के अमराराम चुनाव जीते, इसके बाद 2008 में माकपा के ही पेमाराम ने सीट पर कब्जा किया था। हालांकि 2013 में भाजपा ने इस सीट पर जीत दर्ज कर ली।

– मालपुरा

मालपुरा सीट से कांग्रेस लगातार हार का सामना करना पड़ रहा है। कांग्रेस मालपुरा से पांच चुनाव हार चुकी है। इस सीट पर पिछले पांच में से तीन बार भाजपा और दो बार निर्दलीय उम्मीदवार जीते हैं।

छत पर काले कपड़े दिखे तो कार्रवाई करेगी राजे सरकार

अमित शाह ने दी सीएम वसुंधरा को सलाह

Share.