गहलोत के गढ़ में कांग्रेस के लिए चुनौती

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राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के गढ़ जोधपुर में चार विधानसभा क्षेत्र ऐसे हैं, जहां लगातार तीन विधानसभा चुनाव में भाजपा का उम्मीदवार जीतता आ रहा है। आगामी चुनाव में भी कांग्रेस के लिए सबसे बड़ी चुनौती भी ये चार सीटें ही हैं। कांग्रेस के लिए जहां ये हॉट सीटें हैं, वहीं भाजपा फिर से यहां जीत की पताका फहराने के लिए तैयारी कर रही है।

जोधपुर शहर

जोधपुर शहर विधानसभा क्षेत्र में लगातार तीन चुनाव से कांग्रेस को जीत नसीब नहीं हुई है। साल 2003 में कांग्रेस से दिवंगत जुगल काबरा मैदान में थे। यह चुनाव भाजपा की सूर्यकांता व्यास 3076 मतों से जीतीं। साल 2008 में परिसीमन के बाद इस सीट पर भाजपा के कैलाश भंसाली कांग्रेस के जुगल काबरा हार गए। इसके बाद कांग्रेस ने चेहरा बदलते हुए सुपारस भंडारी को मैदान में उतारा, परंतु वे भी हार गए।

सूरसागर

विधानसभा चुनाव के लिहाज से वर्ष 2003 तक सूरसागर विधानसभा क्षेत्र आरक्षित था। यहां से भाजपा के मोहन मेघवाल ने कांग्रेस के भंवर बलाई को हराया था। परिसीमन के बाद 2008 में भाजपा ने यहां से सूर्यकांता व्यास को टिकट दिया। कांग्रेस ने यहां से सईद अंसारी को उतारा, जो सूर्यकांता से हार गए। वर्ष 2013 में सूर्यकांता के सामने जैफू खां मैदान में उतरे, जिन्हें भी हार नसीब हुई।

शेरगढ़

शेरगढ़ विधानसभा क्षेत्र से लगातार तीन चुनाव भाजपा के बाबूसिंह राठौड़ जीत रहे हैं।

बिलाड़ा

इस विधानसभा क्षेत्र में वर्ष 2003 में भाजपा के रामनारायण डूडी ने राजेंद्र चौधरी को 17557 मतो से हराया था। इसके बाद 2008 में भाजपा के अर्जुनलाल गर्ग ने कांग्रेस के शंकरलाल को हराया। 2013 में कांग्रेस ने हीराराम मेघवाल को उतारा, वो भी हार गए।

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