कांग्रेस के सबसे दिग्गज नेता को भूले राहुल

0

राजनीति की दुनिया में कब क्या हो जाए, कुछ कहा नहीं जा सकता है। कब किसके सितारे चमक उठे और कब धराशायी हो जाएं। ऐसा ही कुछ हुआ है कांग्रेस नेता सीपी जोशी के साथ।

कभी कांग्रेस पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी के लिए अहम रहे सीपी जोशी को उन्होंने किनारे कर दिया है। उन्हें कांग्रेस की सर्वोच्च इकाई कांग्रेस वर्किंग कमेटी से बाहर कर दिया है| साथ ही उनसे असम का प्रभार भी वापस ले लिया गया है।

यह पहला मौका नहीं है, जब जोशी को पार्टी में एक पायदान नीचे उतारा गया हो। इससे पहले भी जोशी को पार्टी ने अनदेखा किया है। कांग्रेस के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले सीपी जोशी को राहुल ने अपनी कांग्रेस की वर्किंग कमेटी से बाहर का रास्ता दिखाया है। राहुल की नई टीम में जोशी को जगह नहीं मिलना राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है। इस बीच चर्चा यह भी है कि पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अशोक गहलोत की सलाह पर नई टीम बनी है।

जोशी के पास 2016 में पूर्वोत्तर के सात राज्यों के साथ ही बिहार, बंगाल और सिक्किम का भी प्रभार था। राजस्थान से वे पहले राष्ट्रीय महासचिव थे, जिसके पास इतने सारे राज्यों का प्रभार था। इसके साथ ही जोशी केंद्र में मनमोहनसिंह की सरकार के दौरान ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज, सड़क परिवहन मंत्रालय का काम संभाल चुके हैं। तृणमूल कांग्रेस के मुकुल राय के इस्तीफे के बाद सड़क परिवहन मंत्री जोशी को रेल मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार भी दिया गया था। जोशी ने कांग्रेस के कई महत्वपूर्ण कार्यों में बड़ी भूमिका निभाई थी।

सीपी जोशी का जहां दबदबा था वहीं अब उनसे एक-एक करके सारे राज्य वापस लिए जा रहे हैं। जोशी से असम का प्रभार वापस ले लिया गया है। पार्टी ने जोशी से एक-एक करके मेघालय, बिहार, पश्चिम बंगाल का प्रभार भी छीन लिया। बिहार में हार का ठीकरा जोशी के सिर फूटा। इसके बाद से लगातार जोशी का कद पार्टी में घटता ही रहा।

सीपी जोशी को राहुल की नई टीम में जगह नहीं दी गई है, जबकि मुकुल वासनिक को इस कमेटी में जगह दी गई। वासनिक को गहलोत का निकट माना जाता हैं।

Share.