राजस्थान में उभरेंगे पायलट

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देश के तीन राज्यों के लिए यह वर्ष चुनावी है| मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में इस वर्ष विधानसभा चुनाव में राजनीतिक रंग अभी से देखने को मिल रहा है| राजा-महाराजाओं के राज्य राजस्थान का राजनीतिक इतिहास बेहद दिलचस्प रहा है और यहां के मौजूदा राजनीतिक हालात भी काफ़ी रोचक हैं|

जहां एक ओर राजस्थान में भाजपा की वसुंधराराजे सरकार अपना वर्चस्व दिखाने का कोई मौका नहीं छोड़ रही है, वहीं दूसरी ओर राजस्थान में कांग्रेस भी मजबूती से चुनावी रण में अपनी मौजूदगी दर्ज करवा रही है| सभी यह जानते हैं कि राजस्थान में किसी भी दल की सरकार को जनता दोबारा मौका नहीं देती, लेकिन बावजूद इसके एक नेता ऐसे हैं, जिन्होंने अब इस किवदंती को बदलने की कवायदें शुरू कर दी है| कांग्रेस के इस सारथी ने प्रदेश में अपने दल को 10 वर्ष के लिए स्थापित करने का जिम्मा उठाया है|

यह कहना भी गलत नहीं होगा कि राजस्थान में कांग्रेस के विमान को पायलट ही उड़ा सकते हैं| राजस्थान कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष सचिन पायलट वहां कांग्रेस का सबसे मजबूत चेहरा बनकर उभरे हैं| महज 26 साल की उम्र में पहली बार सांसद बने पायलट राजनीति के नौसिखिया खिलाड़ी नहीं हैं| वे राजनैतिक परिवेश में पले-बढ़े और राजनीति को करीब से जानने वाले नेता हैं| कांग्रेस के वरिष्ठ नेता स्वर्गीय राजेश पायलट के बेटे सचिन पायलट ने राजनीति में न सिर्फ पारिवारिक गुणों को अपनाया है, बल्कि उन्होंने राजनीति को पढ़ा है, समझा है और जिया है|

राजस्थान के अजमेर से सांसद सचिन पायलट राजस्थान की जनता से करीब से जुड़े  हैं| यही कारण है कि वे आगामी विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की नैया को पार लगा सकते हैं| राजस्थान चुनाव में सचिन पायलट को कांग्रेस का मुख्यमंत्री का चेहरा माना जा रहा है हालांकि इस बात की कोई औपचारिक पुष्टि नहीं हुई है|

यदि देखा जाए तो भाजपा शासित राजस्थान में कांग्रेस सचिन पायलट पर ही दांव खेलेगी| जहां एक ओर सचिन राजनीति में अच्छी पकड़ रखते हैं वहीं वह राजस्थान की जनता के बीच भी काफ़ी लोकप्रिय हैं| राज्य में वसुंधराराजे की सरकार विरोध और विफलताओं से घिरी हुई है और आने वाले चुनाव में इन विफलताओं का फायदा उठाना पायलट बखूबी जानते हैं| वह न सिर्फ कांग्रेस के युवा नेता के रूप में प्रदेश के विकास के मुद्दे पर चुनाव लड़ेंगे बल्कि वह यह भी समझते हैं कि अब जनता किसी दल को लहर के भरोसे चुनाव जीता जा सके|

राजस्थान में कांग्रेस ने मुख्यमंत्री उम्मीदवार की कोई घोषणा नहीं की है और यह कहना भी गलत नहीं होगा कि राजनीति को बारीकी को समझने वाले सचिन  महज सत्ता के लिए चुनाव नहीं लड़ेंगे| वे अपनी दूरदृष्टि से राजस्थान में कांग्रेस को मजबूत करने के साथ-साथ अपने सफल नेतृत्व का परिचय देने के लिए चुनाव में कांग्रेस का रथ आगे ले जाएंगे|

भाजपा का यह दांव भी ध्यान खींचने योग्य है कि जहां पार्टी ने मध्यप्रदेश में शिवराजसिंह चौहान और छत्तीसगढ़ में रमनसिंह को मुख्यमंत्री के उम्मीदवार के रूप में सामने लाकर दांव लगाया है, वहीं ऐसी कोई स्पष्टता राजस्थान में देखने को नहीं मिली| इससे यह तो साबित होता है कि भाजपा कहीं न कहीं वसुंधराराजे को लेकर दुविधा में है|

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पायलट के कुछ बयानों पर नज़र डालें तो यह साफ़ देखने को मिलेगा कि वे भाजपा के इस दांव से भलीभांति परिचित हैं| ऐसे में यदि कांग्रेस को जीत का सेहरा बांधने वाले पायलट के हाथ में राजस्थान की सत्ता आती है तो निश्चित रूप से उनका लक्ष्य महज 5 सालों के लिए शासन करना तो नहीं होगा| पायलट कांग्रेस को राजस्थान में इतना मजबूत कर सकते हैं कि आने वाले 10 सालों में वहां कांग्रेस का कोई विकल्प ही नज़र न आए|

हालांकि विधानसभा चुनाव के नतीजे ही यह साफ़ करेंगे कि राजस्थान के रण में किसने बाजी मारी है और जनता ने किसे अपना नेता बनाया है, लेकिन राजस्थान से भाजपा को खदेड़ने और कांग्रेस को विजयी दिलाने में पायलट कामयाब जरूर हो सकते हैं|

-पॉलिटिकल डेस्क

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