राज्यसभा चुनाव में नहीं होगा नोटा का इस्तेमाल

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सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को एक बड़ा फैसला सुनाया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि राज्यसभा चुनाव में नोटा का इस्तेमाल नहीं होगा। गुजरात कांग्रेस नेता शैलेश मनुभाई परमार की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुनाया है। न्यायाधीश दीपक मिश्रा, एएम खानविलकर और डीवाई चंद्रचूड़ की तीन जजों की पीठ ने फैसला सुनाया। उन्होंने पाया कि नोटा का विकल्प केवल प्रत्यक्ष चुनाव के लिए लागू होना चाहिए न कि अप्रत्यक्ष चुनाव के लिए।

30 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पर सुनवाई कर फैसला सुरक्षित रख लिया था। सुनवाई के दौरान कांग्रेस के साथ एनडीए ने भी राज्यसभा चुनाव में नोटा का विरोध किया था। वहीं चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में राज्यसभा चुनाव में नोटा के इस्तेमाल पर कहा कि यह फैसला आयोग ने संज्ञान लेकर नहीं बल्कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के तहत किया है।

चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट के 2013 के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि राज्यसभा चुनाव में नोटा का इस्तेमाल करना शुरू किया था। गौरतलब है कि 2013 के आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि जिस तरह हर मतदाता को वोट डालने का अधिकार है, उसी तरह उसे किसी को भी वोट न देने का भी अधिकार है। सुप्रीम कोर्ट का आदेश सभी चुनाव पर लागू होगा। सुनवाई के वक्त न्यायाधीश दीपक मिश्रा ने कहा कि राज्यसभा चुनाव में पहले ही काफी मुश्किले हैं। चुनाव आयोग इन्हें और उलझन में डाल रहा है। कानून किसी विधायक को नोटा के इस्तेमाल की इजाजत नहीं देता, लेकिन इस नोटिफिकेशन से चुनाव आयोग विधायकों को वोट ना डालने का अधिकार दे रहा है। जबकि विधायकों का संवैधानिक दायित्व है कि वो नोटा का इस्तेमाल नहीं कर सकते।

वहीं जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि बैलेट बॉक्स में डालने से पहले कोई विधायक बैलेट पेपर को क्यों दिखाए। उन्होंने कहा कि नोटा का इस्तेमाल राज्यसभा चुनाव के दौरान नहीं होना चाहिए। बता दें कि पिछले साल तीन अगस्त को कांग्रेस की याचिक पर सुप्रीम कोर्ट ने नोटा पर रोक लगाने से इंकार कर दिया था। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि इसकी सुनवाई जारी रहेगी।

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