पढ़िए, कौन चलाएगा सूबे की सरकार

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प्रदेश में सरकार बनाने के बाद कांग्रेस ने कमलनाथ को विधायक दल का नेता चुना है, लेकिन कमलनाथ नहीं बल्कि प्रदेश में कोई और नेता ही मुख्यमंत्री होगा। आप भी चौंक गए ना, हां यह सही है, प्रदेश में कमलनाथ तो सिर्फ कुर्सी के सीएम होंगे, लेकिन उनके पीछे दिमाग किसी और नेता का चलेगा।

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ये नेता कोई और नहीं बल्कि प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजयसिंह हैं। दिग्विजयसिंह ही वह शख्स हैं, जिन्होंने विपरीत परिस्थितियों में भी कांग्रेस को मध्यप्रदेश में उबारा था। उनके नेतृत्व में जब 1993 में कांग्रेस की सरकार बनी थी तो उन्होंने दो लड़ाई लड़ी थी, पहली लड़ाई कांग्रेस संगठन के कुछ भीतरी नेताओं से तो दूसरी भाजपा नेतृत्व से।

इस लड़ाई में सफल होने के बाद दिग्विजयसिंह ने प्रदेश में कुछ ऐसी सरकार चलाई कि पूरे दस सालों तक दिग्विजयसिंह का प्रदेश में कोई दूसरा विकल्प पैदा नहीं हो सका। इसके बाद प्रदेश में दिग्विजयसिंह ने ही अधिकारियों के साथ मिलकर सरकार को आगे बढ़ाया। दिग्विजयसिंह ही वह नेता थे, जिन्हें अपने मंत्रियों के अलावा अफसरों के साथ भी बेहतर तालमेल बनाकर काम करने की कला आती थी| यही कारण है कि दिग्विजयसिंह मुख्यमंत्री तो रहे, लेकिन इन 10 सालों में कभी भी उनके कार्यकाल पर किसी भी तरह का दाग नहीं लगा।

अब एक बार फिर कमलनाथ को मदद करने के लिए दिग्विजयसिंह परदे के पीछे से अपनी भूमिका सरकार में निभा सकते हैं। कमलनाथ ने भले ही विभिन्न मंत्रालयों में कार्य किया हो, लेकिन मुख्यमंत्री के तौर पर कमलनाथ नए ही हैं। ऐसे में मंत्रीमंडल में बैलेंस कैसे स्थापित करना है। अधिकारियों को कैसे अपने निर्देशों का पालन करवाना है, इसमें दिग्विजय की भूमिका होगी।

वहीं प्रदेश सरकार में शामिल मंत्रियों और बगावती सुर अपनाने वाले नेताओं को रोकने का काम भी दिग्विजयसिंह कर सकते हैं क्योंकि इस चुनाव में जीतकर आए अधिकांश विधायक ऐसे हैं, जिनके निजी संबंध भी दिग्विजयसिंह से अच्छे हैं, ऐसे में सरकार को किसी तरह की कोई परेशानी न आए, इस बारे में भी दिग्विजयसिंह के कंधों पर जिम्मेदारी होगी।

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