क्या सरताज के सिर आएगा ताज ?

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मध्यप्रदेश में लोकतंत्र का महापर्व आखिरी मुकाम पर पहुंच चुका है। नेताओं की सांसें अटकी हुई हैं। 11 दिसंबर को परिणाम के साथ नई सरकार का ऐलान होगा। 230 सीटों वाले मध्यप्रदेश में 2907 उम्मीदवार मैदान में हैं। इस बार कई सीटों पर सबकी निगाहें टिकी हुई हैं। खासतौर पर बुधनी और होशंगाबाद सीट पर सबकी नज़रें बनी हुई हैं।

होशंगाबाद सीट से विधानसभा अध्यक्ष सीतासरन शर्मा और भाजपा के पूर्व पीडब्ल्यूडी मंत्री सरताजसिंह की साख दांव पर है। दोनों के बीच यहां कांटे का मुकाबला है। भाजपा की बेचैनी केवल होशंगाबाद सीट के लिए नहीं बल्कि पूरे होशंगाबाद जिले के लिए है। सरताजसिंह का प्रभाव होशंगाबाद की सभी सीटों के साथ आसपास के इलाकों में भी है। भाजपा के सभी दिग्गज नेता होशंगाबाद में सभा कर सरताजसिंह के खिलाफ माहौल बनाने की कोशिश कर चुके हैं, परंतु इसका परिणाम 11 दिसंबर को ही पता चलेगा।

दरअसल, एक ही जिले में लगातार स्टार प्रचारकों का आना बताता है कि सरताजसिंह का जाना भाजपा के लिए परेशानी खड़ी कर सकता है। होशंगाबाद में भाजपा की इस बेचैनी का कारण कांग्रेस की रणनीति है। कांग्रेस ने सिवनी-मालवा, जो सरताजसिंह की पारंपरिक सीट है, वहां से ओमप्रकाश रघुवंशी को उतार दिया। वहीं सरताज को विधानसभा अध्यक्ष सीतासरन शर्मा के सामने उतार दिया।

पिछले विधानसभा चुनाव के परिणाम पर गौर किया जाए तो कांग्रेस की यह रणनीति खास है। होशंगाबाद जिले में कांग्रेस ने एक भी सीट नहीं जीती थी। अब कांग्रेस दो सीटों पर मुकाबले में आ गई है| साथ ही दूसरी दो सीटों यानी पिपरिया और सोहागपुर पर भी सरताज फैक्टर का असर दिखाई पड़ सकता है।

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