मप्र चुनाव : वित्तमंत्री का आखिरी चुनाव

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मध्यप्रदेश के चुनावी अखाड़े में पार्टियां ही नहीं बल्कि प्रत्याशी भी अपने समर्थन में मतदान करवाने के लिए अजीबो-गरीब दांव पेंच खेल रहे हैं। कोई बच्चों को साईकिल सिखा रहा है तो कोई उनके साथ झूला झूल रहा है, कोई सुसाइड की धमकी दे रहा है तो कोई मतदाताओं के घर बर्तन मांज रहा है। ऐसा ही एक किस्सा दमोह जिले से सामने आया है जहां 7 बार के विधायक जयंत मलैया उम्र का हवाला देकर वोट मांगते हुए दिखे।

गौरतलब है कि पिछले 28 वर्षों से दमोह सीट पर भाजपा का वर्चस्व रहा है और यह सीट शिवराज सरकार में वित्त मंत्री जयंत मलैया की पारम्परिक सीट रही है, लेकिन इस बार के चुनाव में मलैया पर संकट के बादल छाए हुए हैं और इसी वजह से वे अपने मतदाताओं से कह रहे हैं कि 71 की उम्र हो गई है, इस बार जिता दो, यह मेरा आखिरी चुनाव है। अगली बार नहीं लडूंगा।

मलैया को डर कांग्रेस प्रत्याशी से नहीं बल्कि अपने ही एक मित्र से है, जो पार्टी से बगावत कर निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में मलैया को चुनौती देने चुनावी मैदान में उतर आए हैं। अपने समर्थकों के बीच बाबा के नाम से प्रसिद्ध रामकृष्ण कुसमरिया को इस बार टिकट न मिलने से उन्होंने निर्दलीय उम्मीदवारी पेश कर दी। कुसमरिया दमोह जिले की पथरिया सीट से टिकट चाहते थे, लेकिन पार्टी द्वारा उन्हें और उनके पुत्र को टिकट नहीं दिए जाने से नाराज़ कुसमरिया ने दमोह और पथरिया, दोनों जगह से निर्दलीय नामांकन दाखिल कर दिया। हालांकि पार्टी ने उन्हें मनाने की हरसंभव कोशिश की, लेकिन उनकी जिद के सामने पार्टी हार गई।

वहीं कांग्रेस ने 35 साल के राहुलसिंह को चुनावी मैदान में उतारा है। कांग्रेस के युवा प्रत्याशी राहुल को इन दोनों बुजुर्गों की घर की लड़ाई में अपना फायदा नजर आ रहा है। अब जीत चाहे किसी की भी हो, लेकिन भाजपा के दो दिग्गज आसपास की कई सीटों को प्रभावित करेंगे।

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