मप्र : कांग्रेस-बीजेपी आमने-सामने

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विधानसभा चुनाव जीतने के लिए ‘मिशन-2018’ की तैयारी में जुटी भाजपा और कांग्रेस अब अगले माह से सायबर ‘युद्ध’ के मैदान में दिखाई देगी | दोनों ही पार्टियों ने अपने-अपने दल के सेनापतियों और सैनिकों की घोषणा कर दी है|

सत्ताधारी दल भाजपा ने 5000 सायबर योद्धाओं के साथ 65 हज़ार सायबर  सैनिकों की तैनाती की तैयारी की है, वहीं कांग्रेस ने 4000 युवाओं की ‘टीम राजीव’ बनाकर कुल 69 हजार सायबर सैनिकों की तैनाती की तैयारी की है | इन सभी को सायबर ‘योद्धा’ नाम दिया गया है, जो एक-दूसरे के विरुद्ध सोशल मीडिया पर किए जाने वाले हमलों के दौरान अपनी प्रमुख भूमिका निभाएंगे| दोनों ही दल इन दिनों अपने- अपने योद्धाओं को ट्रेनिंग देने का काम कर रहे हैं, जो आगामी चुनाव में महती भूमिका निभाकर पार्टी के पक्ष में माहौल खड़ा करने का काम करेंगे|

1 के बदले 100 प्रश्न

जुलाई माह से शुरू होने वाले सायबर ‘युध्द’ में भाजपा फिर आगे रहने की तैयारी कर चुकी है| पार्टी ने सायबर युद्ध की ऐसी तैयारी की है, जिसके दम पर वे कांग्रेस के 1 प्रश्न के जवाब में 100 प्रश्न दागेगी| हालांकि कांग्रेस ने अभी से स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि प्रश्न का उत्तर होता है, उस पर सवाल नहीं किया जाता| इसके लिए कांग्रेस ने सोशल मीडिया फ्रेंडली कार्यकर्ताओं की टीम बनाई है| कांग्रेस के सोशल मीडिया और आईटी सेल प्रभारी अभय तिवारी ने बताया कि इस टीम को 50 लोगों की टीम लीड करेगी, जो हर समय अलर्ट रहकर अपना काम करेगी|

बूथ स्तर तक रहेगी पकड़

भाजपा के सायबर सैनिकों के विरुद्ध कांग्रेस ने जिला, विधानसभा और बूथ स्तर समन्वयक तैयार किए हैं, जिनकी पकड़ सभी 650000 चुनाव बूथों तक रहेगी| इन सायबर योद्धाओं का एक ही लक्ष्य होगा, सत्ताधारी पार्टी के पिछले 3 सालों की कमियों को लोगों, खासकर युवाओं तक पहुंचाना है | कांग्रेस और भाजपा का आईटी सेल विभाग राजधानी में ही काम करेगा, जिसे सायबर ‘वार’ रूम भी कहा जा सकेगा| यहां से चुनावी आचार संहिता लगने के बाद सभी वीडियो और कंटेंट पहले आयोग को भेजे जाएंगे और अनुमति मिलने के बाद सोशल मीडिया पर अपलोड किए जाएंगे|

10 सालों की तुलना होगी 15 सालों से

सायबर युद्ध के दौरान कांग्रेस के 10 साल के शासनकाल की तुलना भाजपा की 15 साल की सत्ता से की जाएगी| इस सायबर वार के दौरान जहां भाजपा दिग्विजयसिंह के कार्यकाल की यादें ताजा करेगी, वहीं कांग्रेस शिवराजसिंह सरकार के पिछले 3 साल के काम-काज का लेखा-जोखा आम लोगों तक ले जाकर उन्हें याद दिलवाएंगे | वैसे दोनों ही दलों का लक्ष्य है कि ज्यादा से ज्यादा लोगों तक वे अपनी बात पहुंचा सकें, दोनों पार्टियों का लक्ष्य भी 35 फीसदी लोगों तक पहुंचने का है| दोनों ही दल दावा कर रहे हैं कि 20 से 25 फीसदी मतदाताओं तक वे अपनी बात पहुंचाने में सफल होंगे|

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