अपनों से ज्यादा गैरों पर यकीन

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मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव को अब बस कुछ दिन शेष हैं। पार्टियों ने इस बार अपनी जीत के लिए दमदार योद्धाओं को अपनी तरफ आकर्षित करने की पूरी कोशिश की है और पार्टियां उसमें सफल भी हुई और दूसरे पार्टियों से आए योद्धाओं को चुनावी रणभूमि में बिना झिझक उतार दिया। दलों ने अपने से ज्यादा दूसरे दल से आए नेताओं पर भरोसा दिखाया है।

कांग्रेस ने जताया भरोसा

– गाडरवाड़ा से 2013 में निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर दूसरे स्थान पर रहीं सुनीता पटेल को कांग्रेस ने टिकट दिया है। उन्हें कांग्रेस उम्मीदवार साधना स्थापक से 12 हज़ार से ज्यादा मत मिले थे।

– देवतालाब से बसपा से आई विद्यावती पटेल पर कांग्रेस ने भरोसा जताया है। विद्यावती 2013 के चुनाव में दूसरे स्थान पर थीं। कांग्रेस के उदयप्रकाश मिश्र तीसरे स्थान पर थे। विद्यावती 3885 वोट से हारी थीं जबकि कांग्रेस प्रत्याशी मिश्र 6473 वोट से हारे थे।

– देवसर से कांग्रेस ने सपा के वंशमणि वर्मा को शामिल कर मैदान में उतारा है। वंशमणि 1998 में कांग्रेस में थे, फिर 2003 में सपा में चले गए। 2013 में निर्दलीय चुनाव लड़े और दूसरे स्थान पर रहे जबकि कांग्रेस उम्मीदवार का नामांकन रद्द हो गया था।

– मानपुर में कांग्रेस ने पिछली बार की निर्दलीय उम्मीदवार ज्ञानवती सिंह पर भरोसा जताया है। ज्ञानवती कांग्रेस से ख़फा होकर निर्दलीय मैदान में उतरी थीं। वे दूसरे स्थान पर रही थीं जबकि कांग्रेस प्रत्याशी शकुंतला प्रधान तीसरे स्थान पर रही थीं।

– होशंगाबाद से कांग्रेस ने भाजपा के वरिष्ठ नेता सरताजसिंह को मैदान में उतारा है। यहां से विधानसभा अध्यक्ष सीतासरण शर्मा भाजपा से विधायक हैं। इस सीट पर पिछली बार कांग्रेस के रवि जायसवाल हार गए थे। सरताज को मजबूत चेहरा मानकर कांग्रेस ने मैदान में उतार दिया है।

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