आखिर कौन होगा शिवराज के बाद…?

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मध्यप्रदेश में विधानसभा चुनाव के आते-आते यह चर्चा शुरू हो गई है कि  आखिर इस चुनाव में प्रदेश का चेहरा कौन होगा? प्रदेश के चुनावी रण में फिलहाल कांग्रेस और भाजपा दोनों ही दल आमने- सामने हैं और दोनों ही दलों के बड़े नेता एक-दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं, लेकिन सबसे बड़ा सवाल अभी भी यही है कि आखिर शिवराजसिंह चौहान के अलावा प्रदेश का चेहरा कौन होगा?

मध्यप्रदेश में भाजपा ने एक नारा दिया है और यही नारा देश में भी चल रहा है। नारा यह है कि शिवराज का कोई विकल्प नहीं है और कांग्रेस चाहकर भी भाजपा और शिवराज का सामना नहीं कर सकती। यह बात 1980 के दशक की तरह ही है, जब राजीव गांधी चुनाव मैदान में थे और चुनावी सर्वे के समय एक शब्द निकलकर आया था, जिसे ‘टीना’ (TINA ) फैक्टर कहा गया था। इसका अर्थ होता है ‘देयर इस नो अल्टरनेटिव’ यानि इसका कोई विकल्प नहीं। भाजपा ने भी शिवराज को लेकर प्रदेश में कुछ इसी तरह का माहौल बनाना शुरू किया है।

यही काफी हद तक सही भी है क्योंकि प्रदेश के दर्जनों बड़े नेताओं के बावजूद इस बार भी शिवराजसिंह चौहान ही भाजपा का चेहरा हैं। प्रदेश की जनता के बीच आज भी शिवराज की छवि एक साधारण और मिलनसार नेता की है। आखिर ऐसा क्या करते हैं शिवराज? क्या शिवराज के पास वाकई लोगों के मर्ज की दवा है या फिर उनका यह मिलनसार स्वभाव एक दिखावा है? इन तमाम सारे सवालों के जवाब यदि विपक्ष को मिल जाए तो शायद चुनाव में गणित उलटा हो जाए।

प्रदेश में अभी जो स्थिति है, उसमें भी शिवराजसिंह चौहान मजबूत नज़र आ रहे हैं क्योंकि हाल ही में जो प्रदेश सरकार में सम्बल योजना चलाई है, वह आम लोगों को सीधा फायदा पहुंचाने वाली है और इसी का फायदा आगामी चुनाव में भाजपा को मिलेगा। वहीं भाजपा में किस तरह की गुटीय राजनीति अभी नहीं है। वहीँ  नेतृत्व भी शिवराज को आगे कर चुका है।

इसके उलट यदि कांग्रेस में देखा जाए तो अभी भी प्रदेश में कांग्रेस के कई गुट चल रहे हैं। प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ की लाख हिदायतों के बाद भी ये गुटीय नेता कहीं ना कहीं बड़े नेताओं के सामने अपनी वाली दिखा ही देते हैं। कांग्रेस के पास सबसे बड़ी समस्या अपने नेताओं को समेटने और इकठ्ठा करके रखने की है। इसके लिए कमलनाथ ने कुछ न कुछ रणनीति तो बनाई ही होगी, लेकिन अभी नेताओं पर वह लागू नहीं की गई है।

ऐसे में भाजपा के इस दावे को गलत साबित करने के लिए कांग्रेस को मेहनत करनी ही होगी। यदि चुनाव से पहले कांग्रेस अपने नेताओं को एक करते हुए शिवराज के खिलाफ आक्रामक रुख अपनाएगी तो यह सोचा जा सकता है कि अब प्रदेश में शिवराजसिंह चौहान का कोई विकल्प है। चुनाव नज़दीक हैं, देखना होगा कि कांग्रेस क्या चमत्कार दिखाती है।

-पॉलिटिकल डेस्क

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