मोदी लहर में भी हारे थे ये भाजपा नेता

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मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव की तैयारी ज़ोर-शोर से चल रही है। पार्टियों ने चुनावी रणभूमि में उतरने के लिए अपनी तलवारें खींच ली हैं। पार्टियों ने जीत के लिए चुनावी-प्रचार शुरू कर दिया है। चुनाव से पहले भाजपा के 10 मंत्री और विधायक मुश्किल में हैं। 2013 में मोदी लहर में भी उनकी नाव डूब गई थी, ऐसे में क्या आगामी विधानसभा चुनाव में पार्टी उन हारे मंत्री हुए पर भरोसा करेगी।

जबलपुर (पाटन) सीट से अजय विश्नोई चुनाव हार गए थे, अब वे जबलपुर शहर  चाहते हैं। कन्हैयालाल अग्रवाल बमोरी से चुनावी मैदान में उतरने की तैयारी कर रहे हैं, जबकि पिछले चुनाव में सीएम ने उनसे सीट बदलने के लिए कहा था। इसी तरह पन्ना (पवई) से पिछला चुनाव हारे बृजेंद्र प्रताप सिंह को भी टिकट के लिए प्रतिद्वंद्विता का सामना करना पड़ रहा है।

बृजेंद्र प्रताप सिंह ने चुनाव प्रबंधन समिति के संयोजक व केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री नरेंद्रसिंह तोमर से मुलाकात कर उनके सामने अपनी बात रखी है। भाजपा में यह व्यवस्था रही है कि चुनाव समिति के सदस्यों से मिलकर उम्मीदवार अपनी व क्षेत्र के समीकरणों की बात रखते हैं, जिसके बाद तय होता है कि टिकट मिलेगा या कटेगा।

अब तक नई प्रदेश चुनाव समिति का गठन नहीं हुआ है जबकि नए प्रदेश अध्यक्ष राकेशसिंह प्रदेश अध्यक्ष मनोनीत हो गए हैं। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, नए चुनाव समिति के गठन के वक्त कुछ पुराने सदस्यों की छुट्टी हो सकती है और कुछ को जगह मिल सकती है। चुनाव प्रबंधन सहित एक दर्जन कमेटियां बन गईं, लेकिन अभी तक चुनाव समिति नहीं बनी है। अब टिकट के दावेदार असमंजस में हैं। वहीं पार्टी कह रही है कि जीतने वाले को ही टिकट देगी।

2013 में हारे मंत्री

– कन्हैयालाल अग्रवाल

– डॉ.रामकृष्ण कुसमरिया

– अजय विश्नोई

– अनूप मिश्रा

– दशरथ सिंह लोधी

– लक्ष्मीकांत शर्मा

– बृजेंद्र प्रताप सिंह

– करण सिंह वर्मा

– जगन्नाथ सिंह

– हरिशंकर खटीक

तैयारी शुरू

पिछले चुनाव में हरिशंकर खटीक महज 233 वोटों से हारे थे। अब दोबारा अपनी दावेदारी पेश कर रहे हैं। इच्छावर से पूर्व मंत्री करणसिंह वर्मा दावेदारी कर रहे हैं, वे 744 वोटों से हारे थे। वहीं व्यापम घोटाले में बरी हुए लक्ष्मीकांत शर्मा ने भी सिरोंज से तैयारी शुरू कर दी है।

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