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ताई और तोमर सहित आधा दर्जन से ज्यादा सांसद खतरे में

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2014 के लोकसभा चुनाव में मोदी लहर के कारण प्रदेश की 29 में से 27 सीटें जीतने वाली भाजपा के नेताओं की नींद अब उड़ी हुई है। विधानसभा चुनाव में हार के बाद अब लोकसभा चुनाव के परिणामों को लेकर भी भाजपा नेताओं को डरावने सपने आने लगे हैं। 4 महीने बाद होने वाले आम चुनाव के लिए भाजपा की लोकसभा की 12 सीट डेंजर ज़ोन में आ चुकी हैं।

इस चुनाव में केंद्रीय मंत्री और ग्वालियर सांसद नरेंद्रसिंह तोमर सहित सांसद अनूप मिश्रा, फग्गनसिंह कुलस्ते, नंदकुमार सिंह चौहान, भागीरथ प्रसाद, प्रहलाद पटेल, रोडमल नागर और सावित्री ठाकुर फिलहाल खतरे में नज़र आ रहे हैं। खुद भाजपा प्रदेशाध्यक्ष राकेशसिंह जबलपुर सीट पर कमज़ोर नज़र आ रहे हैं।

आइये देखते हैं ये रिपोर्ट…

ग्वालियर- नरेंद्रसिंह तोमर

2014 में केंद्रीय मंत्री तोमर 29,699 वोट से जीते थे, लेकिन उनके क्षेत्र में 2018 के विस चुनाव में कांग्रेस ने सात सीटें जीती हैं, जबकि भाजपा 5 से सिमटकर 1 पर आ गई है।

यहां कांग्रेस को ग्वालियर, ग्वालियर पूर्व, ग्वालियर दक्षिण, भितरवार, डबरा, करेरा, पोहरी की सीटें मिली हैं, जबकि भाजपा ग्वालियर ग्रामीण पर ही जीती है।

विधानसभा में इस संसदीय क्षेत्र में कुल 12 लाख 99 हज़ार 812 वोट पड़े, जिसमें कांग्रेस को 5 लाख 58 हज़ार 648 और भाजपा को 424712 और बसपा को 187301 वोट मिले। यहां कांग्रेस 1,33,936 वोट से आगे रही।

भिंड-भागीरथ प्रसाद

ब्यूरोक्रेसी छोड़ राजनीति में उतरे प्रसाद भिंड सीट से 1 लाख 59 हज़ार 961 वोट से जीते थे। 2013 विस चुनाव के मुकाबले इस बार उनके क्षेत्र में भाजपा 4 सीटें गंवा चुकी है। बसपा का खाता खुला है।

विधानसभा चुनाव 2018 के नतीजे यदि देखे जाएं तो यहां कांग्रेस 5 सीटों लहार, मेहगांव, गोहद, सेवढ़ा, भांडेर पर जीती जबकि भाजपा 2 सीटों अटेर और दतिया में ही जीत सकी। वहीं बसपा को भिंड में एक सीट मिली।

लोकसभा क्षेत्र में कुल वोट पड़े  11 लाख 19 हज़ार 211, जिनमें से कांग्रेस को 4 लाख 56 हजार 621, भाजपा को 357341 और बसपा को 160780 वोट मिले।  यहां कांग्रेस 99280 वोटों से आगे रही।

मंडला- फग्गनसिंह कुलस्ते

2014 में कुलस्ते 1,10,469 वोट से जीते थे। अब 2018 में आदिवासी वोट बैंक कांग्रेस की तरफ मुड़ा है। इस लोकसभा में कांग्रेस को 6 शाहपुर, डिंडोरी, बिछिया, निवास, लखनादौन, गोटेगांव की सीटें मिली, जबकि भाजपा को 2 मंडला और केवलारी की सीटें मिली। लोकसभा क्षेत्र में कुल वोट पड़े 1519029,  जिनमें कांग्रेस को 659345, भाजपा को 537657 और बसपा को 18387 वोट मिले। यहां भी कांग्रेस 1,21,688 वोटों से आगे  रही।

इंदौर- सुमित्रा महाजन

2014 में इंदौर से सांसद और लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन साढ़े चार लाख वोटों से जीती थीं। पिछले विधानसभा चुनाव में भाजपा के पास 8 में से 7 सीटें थीं, लेकिन 2018 में यहां कांग्रेस बराबरी पर आ खड़ी है। इंदौर में कांग्रेस को 4 इंदौर 01, राऊ, देपालपुर और सांवेर की सीटें मिली है वहीं भाजपा को इंदौर से दो, तीन, चार और पांच नंबर की सीटें मिली हैं।

इस लोकसभा में कुल 15,92,099 वोट में से कांग्रेस को 7,18,455 और भाजपा को 8,13,835 और बसपा को 11,142 वोट मिले। यहां भाजपा 95380 वोटों से आगे रही।

दमोह- प्रहलाद पटेल

प्रहलाद पटेल 2014 के लोकसभा चुनावों में 2,13,299 वोटों से जीते थे। यहां 2013 में कांग्रेस के खाते में दो सीटें थीं, लेकिन 2018 में उसके पास 4 सीटें हैं। कांग्रेस को बंडा, देवरी, मलहरा और दमोह की सीटें मिली। वहीं भाजपा को रेहली, जबेरा और हटा की सीटें मिली। एक सीट पथरिया की बसपा के खाते में गई।

इस लोकसभा क्षेत्र में कुल 12,93,170 वोट पड़े, जिनमें कांग्रेस को 4,95,094, भाजपा को 5,11,951 और बसपा को 84638 वोट मिले। यहां भाजपा केवल 11 हजार वोट से आगे रही।

खंडवा- नंदकुमारसिंह चौहान

बीते चुनाव में इस लोकसभा से पूर्व प्रदेश अध्यक्ष नंदकुमारसिंह चौहान 2,59,714 वोट से जीते थे। 2013 में भाजपा की 7 सीटें थीं, अब 3 सीटों पर सिमट गई है।  यहां कांग्रेस ने नेपानगर, भीकनगांव, बड़वाह और मंधाता की सीटें जीती जबकि भाजपा खंडवा, पंधाना और बागली की सीटें जीतीं जबकि बुरहानपुर सीट पर एक निर्दलीय प्रत्याशी जीता।

यहां कुल 14,42,432 वोट पड़े, जिनमें कांग्रेस को 563706, भाजपा को 635973, और निर्दलीय को 98561 वोट मिले। यहां कांग्रेस 26,294 वोटों से आगे रही।

जबलपुर- राकेश सिंह

बीते चुनाव में 208639 वोट से जीतने वाले राकेश सिंह भाजपा की दो सीटें नहीं बचा पाए। पिछले विस में भाजपा के पास छह सीटे थीं, लेकिन अब भाजपा 4 पर आ गई है।

जबलपुर लोकसभा क्षेत्र में कांग्रेस जबलपुर पूर्व, जबलपुर पश्चिम, बरगी और जबलपुर उत्तर में जीती जबकि भाजपा पाटन, जबलपुर केंट, पनागर और सीहोरा में जीती। यहां कुल 1283506 वोट थे, जिनमें से कांग्रेस को 529673, भाजपा को 567506 और बसपा को 29456 वोट मिले। भाजपा 37833 वोटों से आगे रही।

धार- सावित्री ठाकुर

इस लोकसभा से जयस को कम आंकने की भूल भाजपा को भारी पड़ी। इस लोकसभा में  2013 में भाजपा के पास 6 सीटें थीं, जो अब कांग्रेस के पास है। धार लोकसभा में कांग्रेस सरदारपुर, कुक्षी, गंधवानी, मनावर, बदनावर और धरमपुरी में जीती जबकि भाजपा धार और महू में जीती। यहां कुल 1377351 वोट में से कांग्रेस को 743526, भाजपा को 523456 और बसपा को 14734 वोट मिले। यहां कांग्रेस 220070 वोटों से आगे रही।

राजगढ़- रोडमल नागर

लोकसभा चुनावों में रोडमल सवा दो लाख वोटों से जीते थे। 2013 में भाजपा की 6 सीटें थीं, लेकिन अब 5 सीटों पर कांग्रेस का कब्जा है। यहां कांग्रेस राजगढ़, खिलचीपुर,चाचौड़ा, ब्यावरा और राघोगढ़ में जीती,  भाजपा नरसिंहगढ़ और सारंगपुर में जीती जबकि सुसनेर सीट पर निर्दलीय ने जीत दर्ज की।

लोकसभा क्षेत्र में कुल वोट 1358359 पड़े, जिनमें कांग्रेस को 634687, भाजपा को 525481 और निर्दलीय को 75804 वोट मिले। यहां कांग्रेस 185010 वोटों से आगे रही।

मुरैना- अनूप मिश्रा

अटलजी के भतीजे और वरिष्ठ सांसद अनूप मिश्रा 2014 में अपने लोकसभा क्षेत्र से 1,32,981 वोट से जीते थे। यहां 2013 में भाजपा के पास 5 सीटें थीं, लेकिन 2018 के विस चुनाव में कांग्रेस ने इस क्षेत्र की 7 सीटें जीती हैं। अनूप मिश्रा भी इस विधानसभा चुनाव में मैदान में थे और वे भितरवार से हार गए।

मुरैना में कांग्रेस श्योपुर, सबलगढ़, जौरा, सुमावली, मुरैना, दिमनी और अंबाह जैसी 7 सीटों पर जीती जबकि भाजपा विजयपुर में ही जीत सकी।

लोकसभा में कुल 12,45,503 वोट पड़े, जिनमें भाजपा को 384382, कांग्रेस को 511224 और बसपा को 22179 वोट मिले। यहां कांग्रेस 1,26,842 वोटों से आगे रही।

बैतूल- ज्योति धुर्वे

2013 के विधानसभा चुनाव में इस क्षेत्र में भाजपा के खाते में 6 सीटें थीं, जो अब घटकर अब 4 रह गई हैं। बैतूल लोकसभा में कांग्रेस मुलताई, बैतूल, घोड़ाडोंगरी और भैंसदेही पर जीती जबकि  भाजपा अमला, हरदा, हरसूद और टिमरनी में जीती।

कुल वोट पड़े 1387463, जिनमें कांग्रेस को 638329, भाजपा को 597653 और बसपा को 19523 वोट मिले। कांग्रेस 40676 वोटों से आगे रही।

उज्जैन-चिंतामणी मालवीय

बीते लोकसभा चुनाव में चिंतामणि मालवीय 3 लाख वोट से जीते थे। उज्जैन में 2013 में आठों सीट भाजपा जीती थी, अब कांग्रेस ने 5 सीटें छीन लीं। अब बड़नगर, नागदा-खाचरौद, तराना, घटिया और आलोट विधानसभा में कांग्रेस का कब्जा है। भाजपा महज 3 सीटों उज्जैन उत्तर, उज्जैन दक्षिण और महिदपुर में जीत पाई।

उज्जैन में कुल वोट पड़े 1121791, इनमें कांग्रेस को 522106, भाजपा को 592028 और निर्दलीय को 55279 वोट मिले। यहां भाजपा 14,643 वोटों से आगे रही।

लोकसभावार आई इस रिपोर्ट से यह साबित होता है कि प्रदेश की 12 लोकसभा सीटों पर सांसदों का जनाधार घटा है। ऐसे में आने वाले चुनावों को लेकर अभी से सांसद अपनी तैयारियों में जुट गए हैं।

 

– राहुल तिवारी

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