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एक वोट की कीमत समझने के लिए पढ़ें यह ख़बर..

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चुनाव में मतदाता नेताओं के लिए भगवान के समान होते हैं। एक वोट भी सत्ता पलट देता है। वोट की कीमत समझने के लिए इतिहास के पन्नों में कई उदाहरण दर्ज हैं। भारत से लेकर फ्रांस, जर्मनी और अमरीका तक कई किस्से हैं, जो एक-एक वोट की कीमत का उदाहरण देते हैं। आज हम आपको ऐसे ही कई किस्सों के बारे में बताने जा रहे हैं, जो ‘एक वोट’ की सार्थकता का सटीक उदाहरण है।

अटल बिहारी वाजपेयी

1999 में एआईएडीएमके के समर्थन वापस लेने के बाद वाजपेयी सरकार को विश्वास प्रस्ताव रखना पड़ा। विश्वास प्रस्ताव के पक्ष में 269 और विरोध में 270 वोट पड़े और सरकार गिर गई।

सीपी जोशी नहीं बन पाए सीएम

वर्ष 2008 के राजस्थान विधानसभा चुनाव में सीपी जोशी सीएम पद के दावेदार थे, परंतु चुनाव में एक वोट से हार गए। सीपी जोशी को 2008 विधानसभा चुनाव में 62,215 और कल्याणसिंह को 62,216 मत मिले थे।

एआर कृष्णमूर्ति, जेडीएस विधायक नहीं बन पाए

2004 के कर्नाटक विधानसभा चुनाव में जेडीएस के एआर कृष्णमूर्ति को 40 हजार 751 वोट मिले और कांग्रेस के आर.ध्रुवनारायण को 40 हजार 752 वोट मिले ।

फ्रांस की राजशाही खत्म

लोकतंत्र पाने के लिए संघर्षों की तमाम गाथाएं इतिहास में दर्ज हैं। वर्ष 1875 में एक वोट ने फ्रांस की सत्ता का स्वरूप ही बदल दिया। एक वोट की जीत से ही फ्रांस में नेपोलियन राजशाही की वापसी का फैसला खारिज हुआ था और लोकतंत्र बरकरार रहा था।

हिटलर को बनाया नाजी दल का मुखिया

जर्मनी  जिस तानाशाह के राज से होकर गुजरा, उसकी तानाशाही की बुनियाद भी एक ही वोट से रखी गई थी इसलिए एक वोट की ताकत को जर्मनी के लोगों से बेहतर शायद ही कोई जानता होगा। वर्ष 1923 में एडॉल्फ हिटलर एक वोट के अंतर से ही नाजी दल के मुखिया बने थे।

अमरीका की भाषा बदली

वर्ष 1776 में एक वोट की बदौलत ही जर्मन की जगह अंग्रेजी को राष्ट्रभाषा का दर्जा मिला। 1910 में न्यूयॉर्क के 36वें कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट्स चुनाव में रिपब्लिक प्रत्याशी सिर्फ एक वोट से हार गया था।

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