जानें आखिर कौन हैं मप्र के नए सीएम कमलनाथ ?

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मध्यप्रदेश को अब नए मुख्यमंत्री मिल गए। कमलनाथ अब प्रदेश की कमान संभालेंगे। भोपाल में विधायक दल की बैठक में प्रस्ताव पारित कर मुख्यमंत्री चुनने के लिए कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को अधिकृत किया गया था। दिनभर चली मैराथन बैठक में केंद्रीय नेतृत्व ने कमलनाथ के नाम पर मुहर लगा दी।

बहरहाल, कमलनाथ अब मध्यप्रदेश के नए मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेंगे। आखिर कौन हैं कमलनाथ और कैसे वे राजनीति के दिग्गज नेताओं में शुमार हो गए। आइए जानते हैं, कमलनाथ के बारे में खास बातें।

कानपुर में जन्म

मध्यप्रदेश के नए मुख्यमंत्री कमलनाथ का जन्म 18 नवम्बर 1946 को उत्तरप्रदेश के कानपुर शहर में हुआ था। देहरादून स्थित दून इंटरनेशनल स्कूल से पढ़ाई करने के बाद कमलनाथ ने कोलकाता के सेंट ज़ेवियर कॉलेज से उच्च शिक्षा हासिल की।

संजय गांधी के जिगरी दोस्त

दून में पढ़ाई के दौरान कमलनाथ की मुलाक़ात संजय गांधी से हुई। वक्त के साथ कमलनाथ और संजय की दोस्ती गहरी होती चली गई। संजय से दोस्ती के कारण कमलनाथ गांधी परिवार के करीबी बने, परंतु कमलनाथ के जीवन में वो पल भी आया, जब 23 जून 1980 को नई दिल्ली में एक विमान हादसे में संजय गांधी की मौत हो गई और उन्हें अपने जिगरी दोस्त को खोना पड़ा।

ऐसे पहुंचे लोकसभा

कमलनाथ ने पहली बार मध्य प्रदेश के आदिवासी बहुल इलाके छिंदवाड़ा से आम चुनाव लड़ा, जीत दर्ज की और  महज 34 साल की उम्र में कमलनाथ ने बतौर सांसद लोकसभा में कदम रखा। इस समय तक कमलनाथ एक बिजनेसमैन थे, लेकिन वक्त के साथ वे राजनीति में मंझते चले गए और उनका नाम देश के दिग्गज नेताओं की फेहरिस्त में अंकित हुआ।

24 घंटे खुला रहता है कार्यालय

 

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली स्थित उनका कार्यालय कार्यकर्ताओं के लिए 24 घंटे खुला रहता है। वहीं इस बात की भी चर्चा और किस्से आम हैं कि यदि ज़रूरतमंद और कोई शख्स  कमलनाथ के लोकसभा क्षेत्र यानी छिंदवाड़ा से दिल्ली आता है तो कमलनाथ की ओर से उसकी हरसंभव मदद की जाती है।

सैटेलाइट फोन इस्तेमाल करने वाले शुरूआती नेता

यूं तो आज के दौर में मोबाइल फोन इस्तेमाल करना आम बात हो चुकी है, लेकिन सूचना क्रांति के शुरुआती दिनों में सैटेलाइट फोन अपने आप में बड़ी चीज हुआ करती थी। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कमलनाथ उन चुनिंदा नेताओं में से थे, जो उस दौर में सैटेलाइट फोन का इस्तेमाल करते थे।

हवाला कांड के कारण नहीं लड़ पाए थे चुनाव

वैसे तो कमलनाथ की छवि साफ-सुथरी मानी जाती है, लेकिन हवाला कांड में नाम आने के  कारण कमलनाथ साल 1996 में हुए लोकसभा चुनाव नहीं लड़ पाए थे। पार्टी ने उनकी जगह उनकी पत्नी अलका को टिकट दिया। अलका भारी मतों से विजयी हुईं।

सिख विरोधी दंगों में नाम का जिक्र

कमलनाथ के नाम का ज़िक्र साल 1984 में हुए सिख विरोधी दंगों की सहभागिता में भी आता है।  हालांकि जांच के दौरान न तो उनके खिलाफ कोई ठोस सबूत मिला और न ही उनके खिलाफ कोई अपराध सिद्ध हो पाया।

कहा जाता है बिजनस टायकून

कमलनाथ न सिर्फ एक राजनेता है बल्कि वे एक बड़े बिजनसमैन और कारोबारी हैं। कांग्रेस के कार्यकाल में वे उद्योग मंत्रालय, कपड़ा मंत्रालय, वन और पर्यावरण मंत्रालय, सड़क और परिवहन मंत्रालय की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कमलनाथ 23 बड़ी कंपनियों के मालिक हैं, जिसके चलते उन्हें बिजनस टायकून भी कहा जाता है।

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