कमलनाथ की दो टूक – “काम करो या घर बैठो”

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चुनावी तैयारियों में जी-जान से जुटे प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नेताओं की लापरवाही से खासे नाराज़ हैं। जिलों में संगठनात्मक कामों के लिए दी गई जवाबदारियों को पूरा होते न देख नाराज़ कमलनाथ ने आपात बैठक बुलाकर नेताओं की जमकर खबर ली। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि या तो काम करो या फिर घर बैठ जाओं। एक-एक नेता से उन्होंने वन टू वन चर्चा कर सौंपे गए कामकाज की समीक्षा भी की और आधी-अधूरी जानकारी मिलने पर खरीखोटी सुनाने से भी वे बाज़ नहीं आए। इस दौरान उन्होंने 35 जिलों में प्रभारियों की नियुक्ति भी की, जो मंडलम और सेक्टर कमेटियों का गठन और समन्वय का काम देखेंगे। कमलनाथ का पारा पिछले एक सप्ताह से चढ़ा हुआ है।

दफ्तर में ही नहीं बैठना है मुझे

बैठक में उग्र तेवर दिखाते हुए नाराज़ कमलनाथ ने साफ कहा कि मुझे सिर्फ दफ्तर और बंगले में ही कैद नहीं रहना है बल्कि प्रदेशभर में दौरे करना है, जनता के बीच जाना है। आप लोगों पर विश्वास कर संगठन के कामों की जवाबदारी सौंपी, अभी तक वे काम पूरे नहीं हुए। यदि यही गति रही तो कैसे पार्टी चुनाव मैदान में मोर्चा ले पाएगी। साहब के इतने तीखे तेवर देख नेता भी दम साधे चुपचाप सुनते रहे। कमलनाथ ने पिछले कुछ दिनों में लिए फैसलों के जरिये यह बता दिया है कि कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यही कारण है कि अब पीसीसी पर चेहरे दिखाने और हवाबाजी करने वाले नेता नज़र नहीं आ रहे।

एक माह में गठित हो मंडलम व सेक्टर कमेटियां

चुनाव के मद्देनजर पीसीसी चीफ का सबसे बड़ा मिशन हर जिले में मंडलम और सेक्टर कमेटियों के गठन का है। 35 जिलों में इसे लेकर उन्होंने प्रभारियों की नियुक्ति कर इसकी टाइम लिमिट भी तय कर दी है। 30 अगस्त तक हर हाल में इसके गठन के निर्देश उन्होंने प्रभारियों को दिए हैं।

खास माने जाने वाले भी निशाने पर 

महज डेढ़ माह में माणक अग्रवाल जैसे नेता को प्रभार मुक्त कर उन्होंने इस बात के भी संकेत दे दिए कि उनका कोई कितना भी खास हो, रिजल्ट नहीं तो पद भी नहीं। अभी और भी नेता है, जिन्हें पद से दूर किया जाना है। इनमे प्रदेश कोषाध्यक्ष गोविंद गोयल का नाम प्रमुख है। गोयल को इंदौर में की गई गलतबयानी का खामियाजा भुगतना पड़ सकता है। सागर से दो बार के विधायक रहे प्रकाश जैन पार्टी के नए कोषाध्यक्ष हो सकते हैं।

दिल्ली से अभय को भोपाल बुलाया

टीम राहुल का अहम हिस्सा बन चुके इंदौर के नेता अभय दुबे को चुनाव के मद्देनजर खासतौर पर प्रदेश में बुलाया गया है। कांग्रेस की राष्ट्रीय प्रवक्ता पेनल में शामिल अभय को प्रदेश मीडिया विभाग में उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई है। उनके साथ भूपेंद्र गुप्ता भी सह उपाध्यक्ष बनाए गए हैं। माणक अग्रवाल को हटाकर शोभा ओझा को मीडिया की जवाबदारी देना साथ में अभय दुबे जैसे नेता की नियुक्ति करने के पीछे मीडिया टीम को आक्रामक बनाना प्रमुख कारण है।

-प्रदीप जोशी

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं)

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