राजस्थान चुनाव: इस शख्स को है चुनाव लड़ने का शौक

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राजस्थान विधानसभा चुनाव की तैयारी शुरू हो गई है। पार्टियों में टिकट बंटवारे को लेकर मंथन जारी है। वहीं जयपुर में एक ऐसा शख्स है, जो सांसद का चुनाव जीते बिना एमपी साहब के नाम से जाना जाता है। इस आदमी को चुनाव लड़ने का काफी शौक है। नागौर जिले की नावां विधानसभा क्षेत्र के कुचामन शहर के रहने वाले कैलाशचंद वर्मा को चुनाव लड़ने का शौक है। वे हर बार नावां विधानसभा और नागौर से लोकसभा चुनाव लड़ते हैं।

राजनीति में पहला कदम – कैलाशचंद वर्मा

कैलाशचंद वर्मा ने अपने जीवन का पहला चुनाव 1991 में लोकसभा का लड़ा था। इस चुनाव में वर्मा को 3 हजार 450 वोट मिले, लेकिन उनको चुनाव का नशा सा लग गया। इसके बाद उन्होंने 1993 में विधानसभा चुनाव लड़ा और 1 हजार 20 वोट हासिल किए। इसके बाद 1998 में फिर विधानसभा का चुनाव लड़ा, जिसमें 700 वोट मिले। 2003, 2008, 2013 में भी विधानसभाओं के चुनाव लड़ा, जिनमें हजार वोट का आंकड़ा भी पहुंच नहीं पाए।

मिली पहली सफलता

वर्मा ने 2000 में कुचामन नगरपालिका चुनाव में अपनी किस्मत आज़माई और वार्ड संख्या 7 से निर्दलीय चुनाव लड़ा। इन चुनावों में वर्मा जीत गए और भाजपा का दामन थाम उपाध्यक्ष बन गए। पालिका उपाध्यक्ष के वक्त उन्होंने विधानसभा चुनाव लड़ा। 2005 में कैलाशचंद वर्मा पार्षद पद का चुनाव भी लड़ा, लेकिन इन चुनावों में भी वर्मा को हार का सामना करना पड़ा।

जिंदगीभर चुनाव लडूंगा

कैलाशचंद्र वर्मा का कहना है कि पहले चुनाव लड़ने पर लोग उनका मज़ाक उड़ाते थे, लेकिन भाजपा का उपाध्यक्ष बनने के बाद परिजन ने शादी करवा दी। चुनाव जीतने के बाद मेरा घर बस गया, इसके बाद चुनाव लड़ने की ठान ली।

नहीं करते प्रचार

कैलाशचंद वर्मा का चुनावी खर्च न के बराबर है। वर्मा की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं है, इसके बावजूद लड़ना नहीं छोड़ते। अपना नामांकन भरने के लिए लोगों से सहयोग लेते हैं।

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