जीतू पटवारी को हराने के लिए संघ की रणनीति

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प्रदेश में विधानसभा चुनाव के लिए दम भर रही कांग्रेस ने सबसे आगे विधायक जीतू पटवारी को किया है| जब से जीतू पटवारी विधायक बने थे,तभी से उनका कद कांग्रेस में लगातार बढ़ता चला गया| पटवारी के कार्यकारी अध्यक्ष बनने के बाद उनके कद में जो इजाफा हुआ वह देखने लायक है और वर्तमान में कांग्रेस ‘जन जागरण यात्रा’ का संचालन भी जीतू पटवारी कर रहे हैं|

बीते 5 सालों में जीतू जिस कद के नेता बने हैं उसने भाजपा की चिंताएं बढ़ा दी है| जीतू पटवारी यदि इस चुनाव में फिर से विजय होते हैं और प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बन जाती है, तो उनका कैबिनेट में शामिल होना तय है| वहीँ यदि कांग्रेस हार भी जाए और प्रदेश के कुछ सीटें जीतू पटवारी निकलवा दे, तो भी उनका कद कांग्रेस में बढ़ेगा ही| गुजरात में उनके कार्य से प्रभावित राहुल गांधी ने उन्हें कार्यकारी अध्यक्ष बना दिया| हो सकता है कि प्रदेश में जीतू के प्रभाव के चलते अगले नेता प्रतिपक्ष भी वही हो| यानि कुलमिलाकर जीतू के हाथ में तो लड्डू रहेंगे ही|

ऐसे में जीतू को रोकने के लिए अब भाजपा और संघ दोनों में ही मंथन शुरू हो गया है| जीतू पटवारी को हराने के लिए संघ अब रणनीति बनाने में जुट गया है, जिससे की राऊ में पटवारी का तोड़ ढूंढा जा सके| क्षेत्र से पूर्व विधायक जीतू जिराती एक बार हार चुके हैं, और जनता भी उनके नाम से राजी नहीं है, ऐसे में संघ और भाजपा संगठन उनके बजाय किसी दूसरे नेता को मैदान में उतारने का मन बना रहा है|

ख़बरें हैं कि राऊ से या तो कोई कट्टर संघ चुनाव लड़ेगा, जिसके पीछे पूरे संघ का तंत्र काम करेगा, या फिर इंदौर के क्षेत्र क्रमांक 02 से विधायक रमेश मेंदोला को भी इस क्षेत्र में उतारा जा सकता है| इसके पीछे कारण यह है कि 2 नंबर भाजपा के लिए एक ऐसी सीट है कि वहां से किसी को भी लड़ा दो तो वह जीत सकता है| वहीँ रमेश मेंदोल चुनाव के मैनेजमेंट को सभी जानते हैं| लोगों का कहना है कि मेंदोला कहीं से भी चुनाव जीत सकते हैं|

ऐसे में यदि  मेंदोला राऊ के मैदान में उतरते हैं तो निश्चित ही पटवारी को मुश्किलें हो सकती है| वहीँ भाजपा इस सीट को जीतकर कांग्रेस में भी जीतू पटवारी के पंख कुतर सकती है|

-पॉलिटिकल डेस्क

 

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