नहीं मिल रहा भाजपा को नगर अध्यक्ष

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मध्यप्रदेश में विधानसभा चुनाव के कारण भाजपा संगठन में भी कई बड़े बदलाव देखने को मिले, लेकिन इस बदलाव के बीच कई वर्षों से निष्क्रिय और भाजपा संगठन में कार्यकर्ताओं की नापसंद इंदौर के नगर अध्यक्ष का बदलाव नहीं किया गया| इसके पीछे भाजपा के नेता अलग-अलग तर्क ज़रूर दे रहे हैं, लेकिन बात यही हो रही है कि भाजपा के लिए यह नगर अध्यक्ष ज़रूरी है या भाजपा की मजबूरी है|

इंदौर में भारतीय जनता पार्टी के नगर अध्यक्ष का कार्यकाल 5 वर्षों से भी ज्यादा का हो गया है, लेकिन इन पांच सालों में उनके खाते में उपलब्धियां कम और विवाद ज्यादा आए| ऐसे में कई छोटे कार्यकर्ता भी नगर अध्यक्ष से नाराज़ हुए, वहीं बड़े नेताओं ने तो उनसे बात तक करना बंद कर दिया है|

जब कैलाश शर्मा को अध्यक्ष बनाया गया था तो उनसे यह वादा लिया गया था कि वे सभी को साथ लेकर चलेंगे, लेकिन फिलहाल वे अपनी धुन में अकेले ही चलते जा रहे हैं और कार्यकर्ता कहीं ज्यादा पीछे रह गए हैं| हर जगह दखल देने की आदत के कारण कैलाश शर्मा ने अपने तो ठीक दूसरे नेताओं के काम भी ख़राब किए| इस कारण ही भाजपा युवा मोर्चा और अनुसूचित जाति मोर्चा की नगर कार्यकारिणी अब तक घोषित नहीं हो पाई है|

ऐसे में अब भाजपा संगठन में भी नए नगर अध्यक्ष को लेकर कवायदें शुरू हो गई हैं, लेकिन इसके लिए कोई बड़ा और प्रभावी चेहरा इंदौर में संगठन को नहीं सूझ रहा है| भाजपा में जिन नेताओं को संगठन नगर अध्यक्ष की कमान सौंपना चाहता है, वे चुनाव लड़ने के ख्वाब देख रहे हैं इसलिए संगठन भी पसोपेश की स्थिति में है|

सबसे पहले भाजपा ने एक बार फिर इंदौर नगर की कमान शंकर लालवानी को देने का मन बनाया था| लालवानी नगर अध्यक्ष रहते कम ही विवादों में रहे थे, लेकिन वे विधानसभा की दावेदारी कर रहे हैं, लिहाजा उन्होंने अभी इस पद से किनारा ही कर रखा है|

वहीं पूर्व विधायक और भाजपा के वरिष्ठ नेता गोपीकृष्ण नेमा को भी संगठन नगर अध्यक्ष बनाना चाहता है, लेकिन नेमा की भी साफ़ शर्त है कि वे नगर अध्यक्ष तो बन जाएंगे, लेकिन उनका टिकट नहीं कटेगा| इसी तरह मधु वर्मा और दूसरे नेता भी टिकट के चक्कर में अभी इस पद से दूर ही रहना चाह रहे हैं| ऐसे में इसे भले जरूरी समझा जाए, लेकिन कैलाश शर्मा को भाजपा को झेलना तो पड़ेगा ही|

-पॉलिटिकल डेस्क

 

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