नगर अध्यक्ष बदलते ही बदले कार्यकर्ताओं के सुर

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इंदौर में बीते कई महीनों से भाजपा संगठन में बदलाव के सुर बुलंद हो रहे थे| भाजपा के बड़े नेता जब भी शहर में किसी कार्यक्रम में आते तो कार्यकर्ता उनके काम के बजाय नगर अध्यक्ष की शिकायतों में जुट जाते थे| ऐसे में भाजपा नगर अध्यक्ष का बदलाव पार्टी के लिए ज़रूरी भी था और मजबूरी भी| कैलाश शर्मा जिस तरह से कार्यकर्ताओं से पेश आते थे, उसके बाद कई नेता और कार्यकर्ता इस पद से उनकी विदाई की दुआएं कर रहे थे|

सबसे पहले इंदौर के दशहरा मैदान पर भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष नंदकुमारसिंह चौहान के सामने पार्टी कार्यकर्ता हेमंत नेमा के साथ मारपीट| इसके बाद भाजपा कार्यालय पर एक कार्यकर्ताओं के साथ दिन दहाड़े मारपीट की ख़बरों ने कैलाश शर्मा की छवि को पार्टी के सामने कमजोर करने का काम किया था| नगर अध्यक्ष होने के नाते शहर के संगठन में सर्वोपरि नेता होने का जो दायित्व उन्हें मिला, उसका दंभ भी उनमें नज़र आता था|

जब प्रदेश संगठन ने भारतीय जनता युवा मोर्चा के नए अध्यक्ष की घोषणा की तो उसकी कार्यकारिणी को शर्मा ने 6 महीने बाद तक भी घोषित नहीं होने दिया| इसके अतिरिक्त भाजपा अनुसूचित जाति मोर्चा की कार्यकारिणी भी आज तक घोषित नहीं हुई| इन दोनों ही दलों के कार्यकर्ताओं को कैलाश शर्मा से शिकायत थी, जो कि प्रति फोरम पर खुलकर की जा चुकी थी|

इस तरह तमाम सारे मुद्दों को लेकर शर्मा के बदलाव की जरुरत पार्टी को महसूस होने लगी थी, इसके संकेत भी तभी मिल चुके थे, जब प्रदेश अध्यक्ष नंदकुमारसिंह चौहान की प्रदेश अध्यक्ष पद से छुट्टी हुई थी| इसके बाद प्रदेश अध्यक्ष राकेशसिंह के सामने भी कैलाश शर्मा ने दम तो भरा, लेकिन फिर भी संगठन ने नेमा को जिम्मेदारी देना ज्यादा उचित समझा|

इस तरह कैलाश शर्मा को भले ही पार्टी ने प्रदेश संगठन में बड़ी जगह पदोन्नत करते हुए उन्हें विशेष आमंत्रित सदस्य बना दिया गया हो, लेकिन कहीं ना कहीं शहर में शर्मा का कद संगठन ने जरूर छोटा कर दिया है|

  • -पॉलिटिकल डेस्क
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