वसुंधरा की यात्रा के विरोध में सरकारी कर्मचारी

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राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधराराजे की राजस्थान गौरव यात्रा शनिवार से शुरू हो गई है। यात्रा से पहले भी कांग्रेस इसका विरोध कर रही थी, यात्रा शुरू होने पर भी कर रही है। सीएम वसुंधराराजे ने कांग्रेस द्वारा लगाए आरोप पर अपनी तैयारी पूरी कर रखी है, लेकिन वसुंधरा ने यह नहीं सोचा होगा कि यात्रा शुरू होते ही सरकारी कर्मचारी भी यात्रा पर सवाल खड़ा करेंगे।प्रदेश के आठ लाख कर्मचारियों ने सीएम राजे की राजस्थान गौरव यात्रा का विरोध करना शुरू कर दिया है।

अखिल राजस्थान कर्मचारी एकीकृत महासंघ ने वादाखिलाफी का आरोप लगाते हुए कहा कि राजस्थान गौरव यात्रा के समानान्तर कर्मचारी जागृति यात्रा निकालकर सरकार की नाकामी और वादाखिलाफी को कर्मचारियों तक पहुंचाएंगे।

कर्मचारियों ने कहा, प्रदेश के 8 लाख से अधिक कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर सरकार को अवगत कराते रहे, आंदोलन करते रहे, बावजूद सरकार ने न वेतन विसंगति को दूर किया और न ही सातवें वेतन आयोग को लागू किया। वहीं कर्मचारियों को वेतन कटौती का खामियाजा भी भुगतना पड़ा है।

क्या है आरोप

कर्मचारी महासंघ का आरोप है कि सरकार ने वेतन कटौती और सातवें वेतनमान के एरियर के तौर पर कर्मचारियों को 3000 करोड़ रुपए का भुगतान नहीं किया है। सरकार कर्मचारियों को भुगतान देने के बजाय राजस्थान गौरव यात्रा निकाल रही है। सरकार ने हमेशा कर्मचारी विरोध नीति अपनाई है। वहीं 7वें वेतन आयोग की आधी अधूरी सिफारिशें लागू कर कर्मचारियों को ठगने का प्रयास किया है।

7 अगस्त से यात्रा

एकीकृत महासंघ नेता गजेंद्रसिंह राठौड़ ने बताया कि यात्रा 7 अगस्त से 29 अगस्त तक निकाली जाएगी, जो राजस्थान के सभी जिलों से होते हुए 29 अगस्त को जयपुर पहुंचेगी और उसी दिन 29 अगस्त को जयपुर में एक आक्रोश रैली भी निकाली जाएगी। इसके बाद यदि मांगें पूरी नहीं होती है तो प्रदेश के कर्मचारी हड़ताल पर चले जाएंगे।

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