महू में नहीं बना पा रही चुनावी माहौल

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इंदौर की 9 विधानसभाओं में से सबसे कमजोर मानी जा रही महू विधानसभा में अभी तक भी माहौल नहीं बन पा रहा है। महू में कांग्रेस की ओर से पहले ही मैदान पकड़ चुके पूर्व विधायक और वरिष्ठ नेता अंतरसिंह दरबार जहां स्थानीय होने के नाते लोगों के बीच पहुंच रहे हैं, वहीं अचानक से महू गई हिंदूवादी नेता उषा ठाकुर पर लगातार बाहरी होने के आरोप लग रहे हैं।

इसके चलते उषा ठाकुर और उनके कार्यकर्ता अभी भी महू का गणित समझने में कमजोर साबित हो रहे हैं। वहीं महू में भाजपा प्रत्याशी के वायरल हुए एक वीडियो ने भी इस क्षेत्र में चुनावी मैनेजमेंट की कलई खोल दी है।

क्षेत्र में ठाकुर की एक ऑडियो क्लिप वायरल हो रही है, जिसमें वे कह रही हैं कि मैं पायल नहीं बांट सकती और भंडारे नहीं करवा सकती। मैं तो साधारण प्रत्याशी हूं। उन्होंने कहा कि मैं दो बार विधायक रही हूं, लेकिन कभी भी गलत तरीके से पैसा नहीं कमाया है।

बताया जा रहा है कि ठाकुर के पास कार्यकर्ताओं द्वारा ही इस तरह के प्रस्ताव आए थे कि क्षेत्र में भोजन भंडारे के आयोजन किए जाएं। इसके अतिरिक्त उषा ठाकुर को अभी तक पार्टी की ओर से मिलने वाला फंड भी चुनाव के लिए नहीं मिला है। भारतीय जनता पार्टी की ओर से ठाकुर को चुनाव लड़ने के लिए 25 लाख रुपए दिए जाने थे, लेकिन वे अभी तक नहीं आए हैं, जिससे कार्यकर्ता और प्रत्याशी अपने प्रचार में खर्च भी नहीं कर पा रही हैं। वहीं विधानसभा क्षेत्र क्रमांक 2 से विधायक रमेश मेंदोला ने भी उषा ठाकुर को अपना चुनावी फंड देने की घोषणा की थी, लेकिन पार्टी की ओर से फंड नहीं आने से वह भी ठाकुर को नहीं मिल पाया।

इस तरह कहीं न कहीं फंड और मतदाताओं के प्रतिसाद से दुखी ठाकुर का जनसंपर्क अभी महू में कमजोर पड़ता नज़र आ रहा है।

कार्यकर्ताओं की भी है कमी

ठाकुर को फंड के साथ-साथ कार्यकर्ताओं की कमी भी महू में खल रही है। महू वैसे तो हिंदुत्व और भाजपा के एजेंडे पर जीती जाने वाली सीट है। यहां कई संघ के वरिष्ठ नेता इस क्षेत्र में भाजपा के पक्ष में माहौल बनाते रहे हैं और इसी कारण अंतरसिंह दरबार जैसे मजबूत प्रत्याशी के आगे ठाकुर को उतारना भाजपा की सही रणनीति का ही हिस्सा था, लेकिन अब महू में उषा ठाकुर के साथ गिनती के कार्यकर्ता ही नज़र आ रहे हैं। महू शहर में हुई योगी आदित्यनाथ की सभा में भी कार्यकर्ता ज्यादा भीड़ नहीं जुटा पाए थे। जितने भी लोग योगी आदित्यनाथ को सुनने आए थे, उनमें से अधिकांश लोग अपने मन से योगी को सुनने आए थे। ऐसे में मतदाताओं को लुभा पाने में भी उषा ठाकुर के कार्यकर्ता कमजोर नज़र आ रहे हैं। वहीं बिना कार्यकर्ताओं की सेना के ठाकुर महू में अकेले ही किला लड़ा रही हैं।

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